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शिक्षा की अनमोल विरासत: 1865 से शुरू हुआ जिला स्कूल का सफर, यहीं से पड़ी टाटा कॉलेज की नींव

Published: Sun, 23 Aug 2026 07:00 AM (IST)

चाईबासा जिला स्कूल की 1865 से चली आ रही ऐतिहासिक शैक्षणिक यात्रा को दर्शाया गया है, जिसने टाटा कॉलेज और कोल्हान विश्वविद्यालय की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

27 जनवरी 1954 को टाटा कॉलेज के वर्तमान स्वतंत्र परिसर की नींव रखी गई थी।

27 जनवरी 1954 को टाटा कॉलेज के वर्तमान स्वतंत्र परिसर की नींव रखी गई थी।

HighLights

  1. 1865 में चाईबासा जिला स्कूल की ऐतिहासिक स्थापना हुई।

  2. टाटा कॉलेज की शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल परिसर से हुई।

  3. स्कूल ने चाईबासा में उच्च शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।

मो. तकी, चाईबासा। चाईबासा की पहचान केवल कोल्हान प्रमंडल के प्रशासनिक केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा की एक लंबी और समृद्ध परंपरा वाले शहर के रूप में रही है। 
 
इस शैक्षणिक विरासत की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में जिला स्कूल, चाईबासा का नाम सबसे ऊपर आता है। इसकी कहानी केवल एक पुराने विद्यालय की कहानी नहीं है। 
 
बल्कि उस दौर की गाथा है जब सीमित संसाधनों के बीच चाईबासा में आधुनिक और उच्च शिक्षा का विस्तार आकार ले रहा था।
 

विद्यालय परिसर से शुरू हुआ उच्च शिक्षा का सफर

आज जिस टाटा कॉलेज को चाईबासा में उच्च शिक्षा की पहचान के रूप में देखा जाता है, उसके शुरुआती दिनों की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। एक समय कोल्हान के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। 
 
स्थानीय स्तर पर कॉलेज की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही थी। इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 1951 में टाटा कॉलेज की स्थापना हुई, लेकिन उस समय कॉलेज के लिए अलग परिसर और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। 
 
ऐसे में जिला स्कूल ने आगे बढ़कर अपना परिसर उपलब्ध कराया। 1951 से टाटा कॉलेज की शुरुआती शैक्षणिक गतिविधियां इसी विद्यालय परिसर से संचालित हुईं।


इसके बाद 27 जनवरी 1954 को टाटा कॉलेज के वर्तमान स्वतंत्र परिसर की नींव रखी गई। कॉलेज अपने नए भवन में स्थानांतरित हुआ और धीरे-धीरे पूरे कोल्हान के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित हो गया।

1865 से जुड़ी है जिला स्कूल की ऐतिहासिक कड़ी

जिला स्कूल का इतिहास केवल 1910 से शुरू नहीं होता, बल्कि इसकी जड़ें उन्नीसवीं सदी से जुड़ी हैं। ऐतिहासिक शोध और विद्यालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि 1841 में चाईबासा में एंग्लो-हिंदी स्कूल की शुरुआत हुई थी। 
 
इसका उद्देश्य विशेष रूप से 'हो' समुदाय के बच्चों को शिक्षा देना था। यह विद्यालय 1851 के आसपास बंद हो गया। इसके लगभग डेढ़ दशक बाद, वर्ष 1865 में चाईबासा जिला स्कूल की औपचारिक स्थापना हुई। 
 
वर्ष 1910 इस विद्यालय के माध्यमिक (हाई स्कूल) स्तर के विकास और मान्यता से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसलिए 1865 से शुरू हुई यह यात्रा चाईबासा में संस्थागत शिक्षा के आधार स्तंभ की कहानी बयां करती है।
 

जिला स्कूल से टाटा कॉलेज और फिर विश्वविद्यालय तक

एक ओर जिला स्कूल ने स्कूली शिक्षा की नींव रखी, वहीं इसके परिसर से शुरू हुई टाटा कॉलेज की गतिविधियों ने उच्च शिक्षा के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया। 
 
कला, विज्ञान और वाणिज्य विषयों में शिक्षा का दायरा बढ़ा। आगे चलकर वर्ष 2009 में जब कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, तो टाटा कॉलेज इसका प्रमुख अंग बना। 
 
आज चाईबासा में जो व्यापक शैक्षणिक ढांचा दिखाई देता है, उसकी नींव में जिला स्कूल की ऐतिहासिक भूमिका रही है।
 

तथ्य एक नजर में

  •     वर्ष 1841: चाईबासा में एंग्लो-हिंदी स्कूल की शुरुआत का उल्लेख।
  •     वर्ष 1851: प्रारंभिक एंग्लो-हिंदी स्कूल के बंद होने का समय।
  •     वर्ष 1865: चाईबासा जिला स्कूल की ऐतिहासिक स्थापना।
  •     वर्ष 1910: जिला स्कूल को हाई स्कूल स्तर की मान्यता और विकास।
  •     वर्ष 1951: टाटा कॉलेज की स्थापना, जिला स्कूल परिसर से पढ़ाई की शुरुआत।
  •     27 जनवरी 1954: टाटा कॉलेज के वर्तमान स्वतंत्र परिसर की नींव रखी गई।
  •     वर्ष 2009: कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना।

जिला स्कूल कोल्हान की शिक्षा की नींव से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। इसके इतिहास को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियां चाईबासा की इस ऐतिहासिक यात्रा को समझ सकें।

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मनोहर हेम्ब्रम, चाईबासा

जिला स्कूल ने कोल्हान की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा दी। हमारे दादा और पिताजी की पढ़ाई भी इसी विद्यालय से हुई है। इसलिए इस विद्यालय का महत्व केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है।

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दिलवर हुसैन, चाईबासा

जिला स्कूल की पुरानी शिक्षा परंपरा और टाटा कॉलेज की शुरुआती यात्रा चाईबासा के लिए गर्व का विषय है। जिस शहर में आज विश्वविद्यालय है, वहां कभी उच्च शिक्षा की शुरुआत एक स्कूल परिसर से हुई थी, यह बात नई पीढ़ी को बताना जरूरी है।

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मनोज राउत, चाईबासा

जिला स्कूल केवल चाईबासा का पुराना विद्यालय नहीं है। यह उस शैक्षणिक यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है, जहां से कोल्हान में उच्च शिक्षा के विस्तार की नई कहानी शुरू हुई।

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पिपुन बारीक, चाईबासा