अस्तित्व की लड़ाई या विदेशी प्रोपेगैंडा? दिल्ली में होने वाले 'जनजाति समागम' को लेकर चाईबासा में छिड़ा राजनीतिक संग्राम
दिल्ली में होने वाले 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' को लेकर चाईबासा में विरोध और समर्थन की राजनीति चरम पर है। आदिवासी ...और पढ़ें

चाईबासा शहर में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
HighLights
आदिवासी संगठन पहचान कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं।
आयोजकों ने विरोध को विदेशी फंडिंग से प्रेरित बताया।
आदिवासी संगठनों का आरोप: मूल पहचान को कमजोर करने की साजिश
शनिवार को चाईबासा शहर में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि जनजाति सांस्कृतिक समागम के जरिए आदिवासी समाज की मूल पहचान, विशिष्ट संस्कृति और विचारधारा को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
- संघ परिवार पर निशाना: प्रदर्शन के संयोजक रमेश जेराई ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) परिवार से जुड़े संगठन जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले हो रहा है। संघ परिवार आदिवासियों को उनकी मूल पहचान से दूर करने के लिए वनवासी या जनजाति कहकर संबोधित करता है और सरना व सनातन को एक बताने की कोशिश में जुटा है।
- वोट बैंक की राजनीति: सामाजिक कार्यकर्ता साधु हो ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जल, जंगल और जमीन जैसे आदिवासियों के मूल मुद्दों पर चुप रहती है, लेकिन धर्म और जाति की राजनीति कर वोट बैंक चमकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि देश के भोले-भाले आदिवासियों को दिल्ली ले जाकर भविष्य के चुनावों को प्रभावित करने का ताना-बाना बुना जा रहा है।
जनजाति सुरक्षा मंच का पलटवार
क्या है दिल्ली का जनजाति सांस्कृतिक समागम?
प्रदर्शन में ये रहे मुख्य रूप से उपस्थित
चाईबासा में आयोजित विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से रमेश जेराई, साधु हो, प्रकाश पुरती, गणेश पाट पिंगुवा, हिरामनी देवगम, सागर सिंकु, बिष्णु मिंज, दमयंती सिंकु, यदुनाथ तियु, चंद्रमोहन बिरूवा, बामिया बारी, सनी संदीप देवगम, रेयांश सामाड, उदय सिंह बारी और नीतु देवगम सहित कई आदिवासी सामाजिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे।
