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    चाईबासा ब्लड बैंक में HIV विवाद के बाद आपत्तिजनक शर्तें!: “अगर कुछ भी होता है…” ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले मरीजों से लिखवाया जा रहा खतरा-पत्र

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 11:40 PM (IST)

    चाईबासा ब्लड बैंक में एचआईवी विवाद के बाद मरीजों से ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले खतरा-पत्र लिखवाया जा रहा है। इस पत्र में लिखा है कि “अगर कुछ भी होता है…”। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

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    चाईबासा ब्‍लड बैंक में मरीजों द्वारा लिखाए जा रहे शपथ-पत्र।

    जागरण संवाददाता, चाईबासा। चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पर इन दिनों गंभीर आरोप लग रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले उन्हें शपथ-पत्र लिखवाया जा रहा है, जिसमें यह लिखना पड़ता है कि रक्त चढ़ाने के दौरान अगर कुछ भी होता है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी मरीज पक्ष की होगी।
     
    यह आरोप सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मरीजों ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक के कर्मचारियों द्वारा ऐसा पत्र लिखवाना न केवल असामान्य है, बल्कि बेहद डरावना भी है। 
     
    परिजनों ने बताया कि अस्पताल में कामकाज के दौरान सामान्यतः एक मानक सहमति पत्र भरा जाता है, लेकिन हाल ही में जिस प्रकार का शपथ-पत्र लिखवाया जा रहा है, वह पूरी तरह अलग और गैर-जरूरी प्रतीत होता है।

    एक मरीज के परिजन ने बताया कि हम तो खून लेने आते हैं ताकि मरीज बच सके। लेकिन यहां तो पहले हमें ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। अस्पताल में इलाज होने के बावजूद हर जोखिम हम पर क्यों डाला जा रहा है?

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    थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में HIV पॉजिटिव पाए जाने के बाद बढ़ी खलबली 

    मामला तब और गंभीर हो गया जब कुछ सप्ताह पहले चाईबासा के ही पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद उनके एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई। यह खबर फैलते ही जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। 
     
    इसी घटना के बाद से ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी बनी हुई है और परिजन भय के कारण भी रक्तदान से बचने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल के कर्मचारी उन्हें बार-बार जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से रक्त लाने के लिए कह रहे हैं। 
     
    कई बार कर्मचारी खुद एमजीएम जाकर यूनिट लेकर आते हैं, लेकिन इसके बाद भी परिजनों से एक ऐसी चिट्ठी लिखवाई जाती है जिसमें यह उल्लेख करना होता है कि हमने रक्त स्वयं लाया है और किसी भी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी हमारी होगी।


    मरीजों का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि अस्पताल की जवाबदेही से बचने का तरीका भी प्रतीत होती है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब मरीज किसी बाहरी ब्लड बैंक से रक्त लाते हैं, तो सुरक्षा कारणों से एक अलग प्रकार का सहमति पत्र लिया जाता है।  

    प्रबंधन का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। बाहर से आए रक्त के लिए मरीज पक्ष से सहमति लेना आवश्यक होता है। हालांकि, परिजनों का दावा है कि शपथ-पत्र में उपयोग की गई भाषा अत्यंत कठोर और भय पैदा करने वाली है। 


    ब्लड बैंक में अनियमितताओं के आरोप पुराने नहीं हैं। चाईबासा ब्लड बैंक में अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। कभी रक्त की कमी, कभी समय पर टेस्टिंग न होने की शिकायत तो कभी कर्मचारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए जाते हैं।

    हाल की घटनाओं ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है। शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है और सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह रक्त प्रबंधन प्रणाली की मांग की है।

    परिजनों ने कहा कि ब्लड बैंक में हमेशा पर्याप्त रक्त की उपलब्धता रहे, रक्त की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पारदर्शी हो, किसी भी यूनिट के लिए कठोर जिम्मेदारी मरीजों पर न थोपी जाए, स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करे। घटना के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है, और सूत्रों के अनुसार मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी गई है।