चाईबासा ब्लड बैंक में HIV विवाद के बाद आपत्तिजनक शर्तें!: “अगर कुछ भी होता है…” ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले मरीजों से लिखवाया जा रहा खतरा-पत्र
चाईबासा ब्लड बैंक में एचआईवी विवाद के बाद मरीजों से ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले खतरा-पत्र लिखवाया जा रहा है। इस पत्र में लिखा है कि “अगर कुछ भी होता है…”। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

चाईबासा ब्लड बैंक में मरीजों द्वारा लिखाए जा रहे शपथ-पत्र।
एक मरीज के परिजन ने बताया कि हम तो खून लेने आते हैं ताकि मरीज बच सके। लेकिन यहां तो पहले हमें ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। अस्पताल में इलाज होने के बावजूद हर जोखिम हम पर क्यों डाला जा रहा है?
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मरीजों का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि अस्पताल की जवाबदेही से बचने का तरीका भी प्रतीत होती है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब मरीज किसी बाहरी ब्लड बैंक से रक्त लाते हैं, तो सुरक्षा कारणों से एक अलग प्रकार का सहमति पत्र लिया जाता है।
ब्लड बैंक में अनियमितताओं के आरोप पुराने नहीं हैं। चाईबासा ब्लड बैंक में अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। कभी रक्त की कमी, कभी समय पर टेस्टिंग न होने की शिकायत तो कभी कर्मचारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए जाते हैं।
हाल की घटनाओं ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है। शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है और सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह रक्त प्रबंधन प्रणाली की मांग की है।
परिजनों ने कहा कि ब्लड बैंक में हमेशा पर्याप्त रक्त की उपलब्धता रहे, रक्त की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पारदर्शी हो, किसी भी यूनिट के लिए कठोर जिम्मेदारी मरीजों पर न थोपी जाए, स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करे। घटना के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है, और सूत्रों के अनुसार मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी गई है।

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