चाईबासा, सुधीर पांडेय। 57 साल की विधवा नामसी कौरी ने अपने इकलौते बेटे की शादी बड़े चाव से की। उसे इस बात की खुशी थी कि बेटे के बाहर जाने के बाद अब उसका सुख-दुख बांटने के लिए बहू मिल जाएगी, मगर उसकी खुशी उस समय मायूसी में बदल गई, जब फूस की झोपड़ी देखकर बहू ने ससुराल में रहने से मना कर दिया। शादी के अगले ही दिन वह मायका लौट गई। कहा कि वह तभी लौटेगी जब घर पर छत होगी। 

सरकार की बीआर अंबेडकर आवास योजना के आने से अब नामसी को उम्मीद है कि उसकी बहू अब ससुराल आकर उसके साथ रहेगी। उसका अकेलापन दूर हो जाएगा। पश्चिम सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड के बीडीओ नागेंद्र तिवारी ने पहल शुरू कर दी है। नामसी को जल्द ही पक्का घर मिल जाएगा। नागेंद्र तिवारी बताते हैं कि बड़ा पोखरिया गांव की नामसी कौरी के पति का बहुत पहले निधन हो गया है। एक बेटा है मधु कौरी। वह बाहर मजदूरी करता है। नामसी के परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है। उसके पास रहने के लिए झोपड़ीनुमा घर है। दो सप्ताह पहले वह क्षेत्र भ्रमण पर निकले तो टूटी-फूटी झोपड़ी नजर आयी। पास जाकर आवाज दी तो एक बुजुर्ग महिला बाहर निकली। पूछने पर बताया कि बेटा मजदूरी करने बाहर गया है।

गांव के लोगों ने बीडीओ को बताई कहानी

वह झोपड़ी में रहती है। तब तक बड़ापोखरिया गांव के कई लोग वहां पहुंच गए। उन्हीं लोगों में से एक व्यक्ति ने बताया कि फूस का घर होने के कारण बहू शादी के अगले ही दिन मायका यह कहकर चली गयी कि इस झोपड़ी में नहीं रहेगी। पक्का घर बना लेना तो लेने आ जाना। ग्रामीणों से यह बात सुनने के बाद बीडीओ ने पहल कर आवास पंजीकरण के लिए नाम दर्ज करा दिया। उम्मीद है, इस सत्र में नामसी को आवास मिल जाएगा। गांव के दूसरे लोगों के बीच भी आवास योजना का लाभ मिलने की खुशी साफ तौर पर देखी जा रही है।अंबेडकर आवास योजना में नाम आने से अब नामसी कौरी को बहू के लौटने की उम्मीद जगी है। 

पश्चिमी सिंहभूम के तांतनगर प्रखंड अंतर्गत बड़ा पोखरिया गांव में अपने फूस की झोपड़ी के सामने खड़ी होकर बीडीओ नागेन्द्र तिवारी से दुख बयां करती नामसी कौरी। 

बीडीओ ने कहानी सुन आवास दिलाने की शुरू की मुहिम

2019-20 में 35 अंबेडकर आवास दिए गए हैं। 15 आवास के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है। 20 आवास के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। इसी में एक आवास नामसी कौरी को भी दिया जाएगा। 2016-17 में 25 अंबेडकर आवास बने थे। 2017-18 में 10 अंबेडकर आवास बनाकर लाभुकों को दिए गए हैं।

- नागेंद्र तिवारी, बीडीओ, तांतनगर।

 

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Posted By: Rakesh Ranjan

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