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बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस में हुई पत्थरबाजी, खिड़की का शीशा टूटा, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:30 PM (IST)

चक्रधरपुर रेल मंडल के बड़ाजामदा-नोवामुंडी स्टेशनों के बीच बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस पर पथराव हुआ, जिससे C-1 कोच का शीशा टूट गया।

बड़ाजामदा और नोवामुंडी रेलवे स्टेशनों के बीच बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस में पत्थरबाजी हुई।

बड़ाजामदा और नोवामुंडी रेलवे स्टेशनों के बीच बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस में पत्थरबाजी हुई।

HighLights

  1. बड़ाजामदा-नोवामुंडी स्टेशनों के बीच हुई यह घटना।

  2. शीशा टूटा, लेकिन कोई यात्री घायल नहीं हुआ।

जासं, चक्रधरपुर। रेलवे प्रशासन और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के तमाम दावों और जागरूकता अभियानों के बावजूद ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। 
 
चक्रधरपुर रेल मंडल के बड़ाजामदा और नोवामुंडी रेलवे स्टेशनों के बीच सोमवार सुबह अज्ञात असामाजिक तत्वों ने बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस पर अचानक पथराव कर दिया। 
 

सुबह 10 बजे हुई घटना 

इस घटना में ट्रेन के एक कोच की खिड़की का शीशा टूट गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई यात्री घायल नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10:00 बजे ट्रेन नंबर 18415 (बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस) बड़ाजामदा स्टेशन से नोवामुंडी की ओर जा रही थी। 
 
इसी दौरान रास्ते में अचानक किसी अज्ञात व्यक्ति ने चलती ट्रेन को निशाना बनाकर पत्थर फेंका। पत्थर सीधे ट्रेन के 'C-1' कोच की खिड़की पर जा लगा, जिससे बर्थ संख्या 20 के पास लगा शीशा पूरी तरह टूट गया।
 

यात्रियों में मची अफरा-तफरी 

अचानक हुए तेज धमाके और शीशा टूटने की आवाज से कोच के भीतर मौजूद यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। 
 
गनीमत यह रही कि टूटे शीशे के टुकड़े या पत्थर की सीधी चपेट में कोई यात्री नहीं आया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। 
 
हालांकि, इस घटना के बाद से सफर कर रहे यात्रियों में सुरक्षा को लेकर भारी चिंता और खौफ देखा जा रहा है।
 

आरपीएफ के अभियानों के बाद भी बेखौफ अपराधी 

यात्रियों का कहना है कि चलती ट्रेन पर पत्थरबाजी न केवल रेलवे संपत्ति का नुकसान करती है, बल्कि यात्रियों की जान के लिए भी सीधा खतरा है। 
 
उल्लेखनीय है कि चक्रधरपुर रेल मंडल में पहले भी पत्थरबाजी के मामले सामने आते रहे हैं। आरपीएफ द्वारा लगातार धरपकड़ और जांच अभियान चलाने के बावजूद इस तरह की आपराधिक गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।