चक्रधरपुर मंडल में रेल पटरी के पास दिखे 24 हाथी: हावड़ा-मुंबई मेल समेत आधा दर्जन ट्रेनें 45 मिनट तक प्रभावित
चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा क्षेत्र में 24 हाथियों के झुंड के रेलवे ट्रैक के पास आने से हड़कंप मच ...और पढ़ें

चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा क्षेत्र में हाथियों का बड़ा झुंड अचानक रेलवे ट्रैक के पास आ गया।
HighLights
हाथियों की मौजूदगी से हावड़ा-मुंबई मेल सहित कई ट्रेनें प्रभावित हुईं।
वन विभाग ने रातभर निगरानी कर हाथियों को जंगल में वापस भेजा।
जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब 24 हाथियों का एक बड़ा झुंड अचानक रिहायशी और रेलवे ट्रैक के पास आ गया।
हाथियों का यह दल डूमेरता अंचल के नार्थ चिरुबेडा जंगल से निकलकर बंडामुंडा श्मशान घाट और मंगल बाजार के बीच पहुंच गया।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों को आबादी वाले इलाके से दूर खदेड़ने की कवायद शुरू की। इसी दौरान झुंड प्रेमनगर गांव के पास रेलवे पटरी से महज 50 से 100 मीटर की दूरी पर स्थित खेतों में जाकर धान खाने लगा।
सुरक्षा के मद्देनजर जारी हुआ कॉशन ऑर्डर
हाथियों के रेलवे ट्रैक के इतने करीब पहुंचने से रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बंडामुंडा पी केबिन तथा के केबिन के बीच कॉशन ऑर्डर जारी किया गया।
रात करीब 8:30 बजे से बुधवार सुबह 7:00 बजे तक बिसरा से राउरकेला के बीच ट्रेनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय कर दी गई।
रेल परिचालन पर पड़ा असर
हाथियों की मौजूदगी के कारण मुख्य लाइन पर करीब 45 मिनट तक रेल परिचालन पूरी तरह प्रभावित रहा। वहीं बंडामुंडा ए केबिन से डूमेरता रेल लाइन के बीच करीब 3 से 4 घंटे तक आवागमन बाधित रहा, जिसके चलते दो मालगाड़ियां घंटों खड़ी रहीं।
हाथियों के कारण प्रभावित होने वाली प्रमुख ट्रेनों में शामिल हैं:
- 12809 मुंबई-हावड़ा मेल
- 12101 जनशताब्दी एक्सप्रेस
- 18006 समलेश्वरी एक्सप्रेस
- 18029 शालीमार एक्सप्रेस
- 18190 टाटानगर एक्सप्रेस
- 13352 धनबाद-एल्लेप्पी एक्सप्रेस
रातभर निगरानी के बाद जंगल की ओर खदेड़ा
वन विभाग की टीम ने पूरी रात निगरानी रखते हुए कड़ी मशक्कत के बाद बुधवार तड़के करीब 5:00 बजे हाथियों के झुंड को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ दिया। इसके बाद सुबह 7:00 बजे रेल प्रशासन ने कॉशन ऑर्डर हटा लिया और रेल परिचालन पूरी तरह सामान्य हो सका।
रेल पटरियों के आसपास हाथियों की लगातार आवाजाही से बंडामुंडा क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष के साथ-साथ ट्रेनों की सुरक्षा भी रेलवे प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
