सिमडेगा:नारी सशक्तिकरण की दिशा में स्त्री शिक्षा एक सार्थक कदम है।इसी परिकल्पना के साथ शिक्षा व सशक्तिकरण को लेकर सेवई संकुल (सेवई एवं पिथरा पंचायत) के विभिन्न गावों में मोटिवेशनल कार्यक्रमों को आयोजित करके महिलाओं को जागरूक करने का कार्य समर्पित शिक्षक अंजनी कुमार सिंह के द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में इन्हें जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है। बस्तुत: नीति आयोग के शिक्षा संबंधित आठ इंडिकेटरो में एक स्त्री शिक्षा (15 वर्ष से ऊपर) भी शामिल है,जिसके लिए अंजनी ने एलआईएफई (लिटरेसी इनिशिएटिव फॉर एम्पावरमेंट) प्रोग्राम बनाया और संबधित क्षेत्र के करीब 70 गांवो में महिलाओं और बच्चो के अधिकार पर आधारित अपने कार्यक्रम से लोगो को जागरूक किए। इनके कार्यक्रम में पुरुष भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है। इसमे 10 - 10 महिलाओ के समूह बनाकर उन्हें मोटीवेट किया जाता है। ये मोटिवेशन इतना कारगर सिद्ध हो रहा है कि महिलाएं बच्चो के विकास के लिए आगे आ रही है। नीति आयोग के इस इंडिकेटर में महिला साक्षरता का तात्पर्य भी बच्चो का विकास ही है। शुरुआत में सेवई पंचायत में महिलाओ की गणना कर साक्षर और निरक्षर महिलाओ की संख्या के आधार पर इस कार्यक्रम को अभिविन्यासित किया गया है ताकि इसकी वयवहारिकता स्पष्ट हो सके, जिससे निर्धारित लक्ष्य बेहतर आउटपुट के साथ प्राप्त हो सके। इस का‌र्क्रम में आंगनबाड़ी सेविका सहायिका, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, जेएसएलपीएस के सदस्य और सहिया तथा जन प्रतिनिधि भी शामिल होती है। अंजनी कहते हैं कि बच्चों को शुरुआती तौर पर शिक्षा भी इन माताओ के द्वारा ही मिलती है। संस्कार में नैतिकता और समयनिष्ठता की पाठ से लेकर पोषण और स्वच्छता तथा स्वास्थ्य तक का भार इनकी ही कंधे पर टिकी होती है। जीवन परक मूल्यों जैसे दया,करुणा, संतोष, धीरज, अर्चना, प्रेम, विचार, सुख-दुख, आनंद, चुनौती, शांति,आदर, सत्कार और देशभक्ति इत्यादि की सीख भी इन्हीं से मिलती है। यहीं कारण शिक्षक अंजनी महिलाओं को शिक्षा समेत अन्य विषयों के प्रति जागरूक करते

हैं फिर उनके ही माध्यम से समाज को सशक्त, संगठित व संस्कारवान बनाने की ओर लगातार अग्रसर हैं।

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