जासं, सिमडेगा : भारतीय पुरुष हाकी टीम के टोक्यो ओलंपिक में करीब 41 साल बाद पदक जीतने की खुशी गुरुवार को झारखंड में हाकी की नर्सरी कहे जाने वाले सिमडेगा जिले में भी दिखी। कांस्य पदक जीत कर इतिहास दोहराने पर यहां मिठाइयां बंटीं। खिलाड़ियों एवं हाकी संघ से जुड़े लोगों ने ढोल व नगाड़ों के धुन पर थिरक कर जश्न मनाया। गीत भी गाए।

मालूम हो कि वर्ष 1972 के म्यूनिख ओलिंपिक में भारतीय पुरुष हाकी टीम में सिमडेगा जिले से माइकल किडो और वर्ष 1980 में मास्को ओलिपिक में सिलबानुस डुंगडुंग ने भारत को पदक पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, इसबार टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय पुरुष टीम में सिमडेगा से एक भी खिलाड़ी नहीं हैं, फिर भी लोगों के उत्साह एवं उमंग में कोई कमी नहीं दिखी।

हाकी झारखंड के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने कहा कि भारतीय टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन कर 41 वर्ष बाद हाकी में एक नया अध्याय जोड़ा है। कहा की एस्ट्रोटर्फ बनने के बाद भारतीय टीम फिर से अपने लय में लौट रही है, जिसका यह सुखद परिणाम देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में हाकी का भविष्य स्वर्णिम होगा, इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारतीय महिला हाकी टीम तीसरे स्थान पर जगह बनाने में कामयाब होगी और पदकलेकर ही लौटेगी।

उधर, भारतीय महिला हाकी टीम में शामिल सिमडेगा की बेटी सलीमा टेटे के पिता सुलक्शन टेटे ने कहा कि यह एक बड़ी उपलब्धि है। वे भारत टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं। यह उम्मीद करते हैं की महिला टीम भी इसी तरह से शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक लेकर देश में लौटेगी। इस मौके पर कमलेश्वर मांझी, हाकी कोच प्रतिमा बरवा, राजू मांझी, दीपक मांझी आदि भी उपस्थित थे।

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महिला टीम का मुकाबला आज

सिमडेगा : तीसरे स्थान के लिए भारतीय महिला हाकी टीम और ब्रिटेन की टीम के बीच शुक्रवार सुबह सात बजे से मुकाबला होगा। अगर भारतीय टीम मुकाबला जीतती है तो देश के साथ-साथ जिले के लिए भी गौरवपूर्ण बात होगी। हर किसी की निगाह झारखंड की बेटियों पर केंद्रित है।

------ वर्ष 1980 में मिला था गोल्ड

ओलिपिक में भारतीय पुरुष हाकी टीम को वर्ष 1972 में कांस्य पदक मिला था। उस समय जिले से माइकिल किडो टीम में थे। वहीं, वर्ष 1980 में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। उस वक्त भी जिले के सिल्बानुस डुंगडुंग टीम में शामिल रहे थे।

Edited By: Jagran