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83 लाख खर्च फिर भी कंकर-पत्थर से भरा मैदान, जलडेगा स्टेडियम के निर्माण में बरती गई लापरवाही

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:18 PM (IST)

जलडेगा के पीएम श्री एसएस प्लस टू हाई स्कूल में 83 लाख रुपये की लागत से बना स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है।

जलडेगा स्टेडियम के निर्माण में बरती गई लापरवाही

जलडेगा स्टेडियम के निर्माण में बरती गई लापरवाही

HighLights

  1. 83 लाख की लागत से बना जलडेगा स्टेडियम अनुपयोगी।

  2. मैदान कंकर-पत्थर से भरा, जलजमाव और घास नहीं उगी।

  3. पहली बरसात में गैलरी टूटी, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल।

संवाद सूत्र, जलडेगा। ग्रामीण खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 83 लाख रुपये की लागत से पीएम श्री एसएस प्लस टू हाई स्कूल जलडेगा के खेल मैदान को स्टेडियम के रूप में विकसित किया गया है। लेकिन लाखों की लागत से निर्माण के बाद भी खिलाड़ियों को सुविधायुक्त मैदान नहीं मिल सका। 

भवन प्रमंडल सिमडेगा द्वारा निर्मित स्टेडियम का मैदान वर्तमान में कंकर-पत्थर से भरा है। बरसात के दिनों में मैदान में पानी जमा होने से खेल गतिविधियां प्रभावित होती हैं। योजना के तहत खिलाड़ियों के लिए समतल और खेल योग्य मैदान विकसित करने के साथ गैलरी और चारदीवारी का निर्माण कराया गया। 

मैदान में घास लगाने के लिए बीज भी डाले गए, लेकिन घास नहीं उगी। बाद में कुछ स्थानों पर घास लगाने का प्रयास किया गया, मगर पानी और रखरखाव के अभाव में वह भी सूख गई। ऐसे में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मैदान की स्थिति खिलाड़ियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

पहली बरसात में टूट गई थी गैलरी

स्टेडियम के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल जून 2025 में पहली बरसात के दौरान ही उठ गए थे। 19 जून को गैलरी का एक हिस्सा भरभराकर टूट गया था। घटना के बाद वरीय अधिकारी के निर्देश पर जांच टीम ने मौके का निरीक्षण किया था। 

इसके बाद जेसीबी से क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण कराया गया। पहली बरसात में ही गैलरी के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल कई सवाल सामने आये थे।

खिलाड़ियों के भविष्य पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि योजना का उद्देश्य गांव के खिलाड़ियों को बेहतर मंच देना था, लेकिन मौजूदा स्थिति में मैदान ही खेल के अनुकूल नहीं है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। 

ग्रामीणों ने मैदान को समतल कर कंकर-पत्थर हटाने, जलनिकासी की व्यवस्था करने और गुणवत्तापूर्ण घास लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि 83 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी यदि खिलाड़ियों को खेल योग्य मैदान नहीं मिलता है तो योजना के उद्देश्य और सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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