संसू, गम्हरिया : लॉकडाउन धोटिकरी गांव की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। कोरोना काल में जहां पूरे विश्व में फैली महामारी से लोग डरे और सहमे हुए हैं, वहीं इस गांव की महिलाओं की सुबह अब योग-प्राणायाम से हो रही है।

दरअसल, गम्हरिया की योग शिक्षिका ऊषा महतो अपने गांव धोटिकरी (सिल्ली) गई थी इसी बीच लॉकडाउन हो गया। जिसके कारण वे गांव में ही फंस गई। गांव में होने के बावजूद वे हर दिन योगाभ्यास करती रहीं। जिसे गांव की महिलाएं और युवतियां भी योग के प्रति आकर्षित हुई। फिर एक दिन कुछ युवतियां और महिलाएं ऊषा महतो के पास आई और योग के फायदे से रू-ब-रू हुई। तय हुआ कि कल से सभी लोग मास्क पहनकर अहले सुबह योग शिक्षिका के दरवाजे पर पहुंचेंगी। जहां शारीरिक दूरी का पालन करते हुए योगाभ्यास शुरू किया जाएगा। अगले दिन से 15-20 महिलाओं को ऊषा महतो ने योग का निश्शुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। महिलाओं को योग से फायदा हुआ तो प्रशिक्षण की अवधि आधे घंटे से बढ़कर दो घंटा हो गई। गांव की महिलाओं पहले योगाभ्यास करतीं हैं फिर गाय-गोबर और किसानी में लगी जाती हैं।

इधर, ऊषा महतो का कहना है कि लॉकडाउन के कारण लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं। लंबी अवधि से घरों में बंद होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी आने लगी है। कई लोग तो घर से बाहर नहीं निकल पाने के कारण डिप्रेशन के शिकार होने लगे हैं। ऐसे में तन और मन को स्वस्थ्य रखने के लिए योग बहुत जरूरी है। ऊषा महतो की इच्छा है कि विश्व योग दिवस के दिन धोटिकरी गांव पूरे विश्व के साथ योगा का कदमताल करे।

Posted By: Jagran

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