सरायकेला : सरायकेला में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। रोज एक न एक गांव में हाथी उत्पात मचा रहे हैं। अब ग्रामीण भी वन विभाग का आस छोड़ दिया है।

रोज गांव बदल-बदलकर हाथी घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अनाज खा जा रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। शुक्रवार को सरायकेला वन क्षेत्र अंतर्गत विश्रामपुर एवं खुदीबेड़ा में तांडव करते हुए चार मकानों को तोड़ दिया और घर में रखे अनाज को खा गया। सबसे पहले हाथियों का झुंड विश्रामपुर गांव जाकर मुकराम टुटू के मकान को तोड़ दिया और घर में रखे अनाज को खा गया। इसके बाद हाथियों ने बुद्धेश्वर मुंडा के मकान को तोड़ दिया और अनाज खा गया। यहां से हाथियों का झुंड खुदीबेड़ा गया जहां मदन लोहार के घर को तोड़कर अनाज खा गया। इसके अलावा प्रसेन लोहार का मकान तोड़कर हाथियों ने अनाज खा गए। डुडांग में जाकर स्कूल का दरवाजा तोड़कर दो क्विंटल मध्याह्न भोजन का चावल खा गया।

वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी सुरेश प्रसाद ने बताया कि सूचना पाकर हाथी भगाने वाला दस्ता गांव पहुंचा और हाथियों को भगाते हुए जंगल की ओर ले गया। शनिवार को हाथियों का झुंड विश्रामपुर जंगल में देखा गया। हाथियों को भगाने के लिए रोजाना वन विभाग को हजारों रुपये के पटाखे, जला मोबिल और जूट के बोरा में खर्च हो जाते हैं। इसके बावजूद हाथी इस इलाके से पलायन नहीं कर रहे हैं। लिहाजा, हाथी प्रभावित इलाके के ग्रामीणों को जान-माल की रक्षा के लिए रतजगा करना पड़ रहा है। हाथियों के लगातार उत्पात से गांवों के लोग सहमे हैं। सरायकेला वन क्षेत्र के रेंजर ने कहा कि बीती रात हाथियों ने दो गांवों में चार मकानों को तोड़ा है और कुछ अनाज भी बर्बाद किया है। उन्होंने कहा कि हाथियों को भगाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन हाथी इसी इलाके में शरण लिए हुए हैं।

Posted By: Jagran

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