जागरण संवाददाता, सरायकेला : सरायकेला वन क्षेत्र के विभिन्न गांवों में हाथियों का तांडव रविवार को भी जारी रहा। हाथियों का झुंड रोज नए इलाकों को अपना निशाना बनाकर क्षति पहुंचा रहे हैं। हाथियों के आतंक से अब तक सरायकेला प्रखंड के दर्जनों गांव प्रभावित हो चुके हैं। हाथियों ने कई घर तोड़कर लोगों को बेघर कर दिया। ठंड में लोग रतजगा कर रात बिता रहे हैं। हाथियों ने घर के साथ-साथ खलिहान में रखे अनाज भी खा जा रहे हैं। एक माह से हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। अधिकारी अभी भी एलर्ट नहीं हुए हैं। हाथ पर हाथ धरे विभाग सिर्फ तमाशा देख रहा है। ग्रामीणों के बीच बांटे गए पटाखे और मोबिल से हाथियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

रविवार को हाथियों के झुंड ने स्कूल एवं पुलिस लाइन को भी नहीं छोड़ा। शनिवार रात 17 की संख्या में जंगली हाथियों का झुंड संजय ग्राम स्थित अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालय की चाहरदीवारी तोड़कर अंदर घुस गया और खिड़कियों को तोड़कर कीचन में रखे सोलह बोरा चावल, एक बोरा आलू, बीस किलो प्याज, बीस किलो दाल व बीस किलो चूड़ा चट कर गया। विद्यालय परिसर में हाथी घुस जाने से बच्चे भयभीत हो गए और रात जागकर बिताई। हाथियों ने अपनी समझदारी दिखाते हुए जिधर बच्चे थे उधर नहीं गया। वरना बड़ा हादसा हो सकती थी। कीचन साफ करने के बाद हाथियों का झुंड चाहरदिवारी तोड़कर निकला और दीवार तोड़कर पुलिस लाइन के मेस का कीचन भंडार में धावा बोल दिया। यहां पर हाथी ने दस बोरे चावल, पचास किलो दाल खा गया। इसके बाद उत्पात मचाते हुए कीचन की खिड़की-दरवाजा को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस के जवानों ने काफी मशक्कत के बाद हाथियों को पुलिस लाइन से भगाया। पुलिस लाइन से हाथियों का झुंड नीलमोहनपुर गांव पहुंच गया। यहां हाथियों ने छोटेलाल सुरेन, बाबूराम सुरेन, बुधन सुरेन, संजीव कैवर्त एवं रुपचांद कैवर्त के घरों को तोड़कर घर में रखे अनाज खा गए। मकर पर्व के लिए लाए गए अनाज को भी हाथियों ने नहीं छोड़ा। ग्रामीणों ने अपने स्तर से आग जलाते हुए ट्रैक्टर के हेड लाइट की रोशनी से किसी तरह गांव से बाहर निकाला।

हाथियों को झुंड अभी भी गांव के बाहर पलास जंगल में घुस गया है। स्थानीय मुखिया मीना देवी ने बताया कि सूचना पाकर व प्रभावित क्षेत्र में पहुंची। प्रशासनिक पदाधिकारी व वन अधिकारियों को हाथी के आतंक की सूचना दी गई है। सूचना पाकर अनुमंडल पदाधिकारी संदीप दुबे व वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी सुरेश प्रसाद पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। मुखिया ने बताया कि प्रभावित लोगों के लिए राशन एवं अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कर दिए गए हैं। मुखिया ने बताया कि हाथियों ने घर तोड़कर पांच परिवार को बेघर कर दिया। उन्होंने वन विभाग व प्रशासन से पीड़ित परिवार का पुनर्वास की मांग की है।

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अपने कॉरिडोर से क्यों भटके रहे हाथी?

वन विभाग ने जिले में जंगली हाथियों के सिजनल आवागमन को लेकर एलीफैंट कॉरिडोर चिह्नित किया है। इससे होकर प्रतिवर्ष दिसंबर-जनवरी माह में जंगली हाथी पश्चिम बंगाल से पांच रास्तों से होकर जिले में प्रवेश करते हैं। चिह्नित कॉरिडोर से होते हुए हाथी ओडिशा तक पहुंचते हैं। इसके बाद मार्च-अप्रैल में जंगली हाथी कॉरिडोर से होते हुए ओडिशा से चलकर जिला से होते हुए वापस पश्चिम बंगाल तक पहुंचते हैं। इधर एलिफेंट कॉरिडोर में अतिक्रमण की स्थिति देखी जा रही है। कॉरिडोर क्षेत्र को नष्ट कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर खनन व अन्य निर्माण कार्यों को लेकर कॉरिडोर छिन्न-भिन्न हो गया है। अब अपने निश्चित मार्ग से चलने वाले जंगली हाथी मार्ग भटककर भोजन की तलाश में आबादी क्षेत्र तक पहुंचने लगे हैं।

कोट ----

हाथियों का आगमन इस वर्ष बढ़ा है। चिह्नित कॉरिडोर मार्ग से भटकाव के कारण जंगली हाथी अन्य ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंच रहे हैं। वन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाकर रखा है। ग्रामीणों की सुरक्षा और हाथियों के सुरक्षित गमन के प्रयास किए जा रहे हैं। तीन माह से हाथियों का तांडव जारी है। इससे काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि हाथियों का दल भोजन के चक्कर में गांवों का रुख कर रहे हैं। वहीं मकर पर्व के दौरान घर-घर में बनाए जा रहे हड़िया भी हाथियों को आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सभी लोगों से हड़िया नहीं बनाने का आग्रह किया है।

- सुरेश प्रसाद, वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी

Posted By: Jagran

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