ग्रामीणों के विरोध के आगे झुका प्रशासन: फूफडीह में खनन-क्रशर पर लगी रोक, विधानसभा समिति करेगी जांच
ग्रामीणों की समस्याओं के बाद झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने राजनगर के फूफडीह-बाड़ेडीह में खनन और क्रशर संचालन पर तत्काल रोक लगा दी है।

पोटका क्षेत्र में संचालित पत्थर खनन और क्रशर के कारण प्रभावित फूफडीह-बाड़ेडीह गांव का झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने स्थल निरीक्षण किया।
HighLights
फूफडीह-बाड़ेडीह में खनन और क्रशर संचालन पर तत्काल रोक।
सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट में अनियमितताओं की होगी जांच।
संवाद सूत्र, राजनगर। सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित फूफडीह-बाड़ेडीह के ग्रामीणों को लंबे समय से हो रही भारी परेशानी से मंगलवार को बड़ी राहत मिली।
पूर्वी सिंहभूम के पोटका क्षेत्र में संचालित पत्थर खनन और क्रशर के कारण प्रभावित फूफडीह-बाड़ेडीह गांव का झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने स्थल निरीक्षण किया।
ग्रामीणों की गंभीर समस्याओं को देखते हुए समिति ने प्रशासन को तत्काल प्रभाव से जांच पूरी होने तक खनन, क्रशर संचालन और हेवी ब्लास्टिंग पर पूर्ण रोक लगाने का कड़ानिर्देश दिया है।
सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट पर खड़े हुए सवाल
समिति के अध्यक्ष सह मझगांव विधायक निरल पूर्ति, मनोहरपुर विधायक जगत माझी और बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव ने निरीक्षण के दौरान लीजधारक के दस्तावेजों की जांच की।
जांच में यह सामने आया कि लीज प्रक्रिया के तहत तैयार की गई सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) रिपोर्ट में केवल पूर्वी सिंहभूम के पोटका अंचल का ही उल्लेख किया गया था।
जबकि खनन क्षेत्र से ठीक सटे सरायकेला-खरसावां के राजनगर अंचल स्थित फूफडीह-बाड़ेडीह गांव को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। समिति ने जिला प्रशासन से लीज की संपूर्ण प्रक्रिया, कागजात और एसआईए रिपोर्ट तलब की है।
पानी का रिसाव और 300 मीटर दूर स्कूल की सुरक्षा का मुद्दा
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने समिति को अपनी आपबीती सुनाई। ग्रामीणों ने बताया कि खनन क्षेत्र की गहरी खदानों में जमा पानी के कारण घरों के फर्श से पानी का रिसाव हो रहा है और मकान दलदलनुमा स्थिति में आ गए हैं।
हेवी ब्लास्टिंग के झटकों से दीवारों में दरारें आ चुकी हैं तथा पत्थर छिटककर छतों और खेल मैदानों तक गिर रहे हैं। खनन स्थल से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित 'एनपीएस फूफडीह विद्यालय' में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर भी गहरा संकट बना हुआ था।
सांसद जोबा माझी की पहल लाई रंग
उल्लेखनीय है कि सिंहभूम सांसद जोबा माझी और झामुमो नेता कालीपद सोरेन ने बीते शनिवार को प्रभावित गांव का दौरा किया था। ग्रामीणों की दुर्दशा देखने के बाद सांसद ने तुरंत मामले को विधानसभा की उपक्रम समिति के समक्ष उठाया।
सांसद की त्वरित पहल के बाद समिति ने मौके पर पहुंचकर जांच की और ग्रामीणों को राहत दिलाई। समिति के कड़े फैसले से फिलहाल ग्रामीणों को तात्कालिक राहत तो मिल गई है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल प्रक्रियागत गड़बड़ियों का है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि लीज आवंटन में नियमों का कितना उल्लंघन हुआ, ग्रामसभा की अनुमति वैध थी या नहीं और प्रभावित गांव को एसआईए रिपोर्ट से बाहर रखने के लिए कौन जिम्मेदार है।
