राजनगर-सरायकेला मार्ग पर पलटा भारी वाहन, रातभर ठप रहा आवागमन; कमर तक गहरे गड्ढों से सहमे राहगीर
राजनगर-सरायकेला मुख्य मार्ग पर एक भारी वाहन गड्ढों के कारण पलट गया, जिससे रातभर आवागमन ठप रहा और यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क की जर्जर हालत पर रोष व्यक्त करते हुए तत्काल स्थायी मरम्मत और भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने की मांग की है।
HighLights
राजनगर-सरायकेला मार्ग पर भारी वाहन पलटा, रातभर आवागमन ठप रहा।
जानलेवा गड्ढों के कारण सड़क दलदल में बदली, दुर्घटना का कारण।
ग्रामीणों ने तत्काल स्थायी मरम्मत की मांग की, आंदोलन की चेतावनी।
संवाद सूत्र, राजनगर। राजनगर-सरायकेला मुख्य मार्ग पर स्थित सारंगपोसी गांव के समीप शनिवार की रात एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। सड़क पर बने जानलेवा गड्ढे के कारण एक भारी वाहन अनियंत्रित होकर बीच सड़क पर पलट गया।
इस दुर्घटना के बाद मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों और ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं।
पूरी रात मार्ग बाधित रहने के कारण चालकों और राहगीरों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी, और रविवार सुबह तक यातायात व्यवस्था सुचारु नहीं हो सकी थी।
दलदल में तब्दील हुई सड़क, बना हादसे का केंद्र
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मार्ग की हालत काफी समय से अत्यंत जर्जर बनी हुई है। पूरी सड़क पर जगह-जगह कमर तक गहरे गड्ढे हो चुके हैं।
हालिया बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे पूरा मार्ग दलदल का रूप ले चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि भारी वाहनों के पलटने के साथ-साथ छोटे वाहन भी आए दिन इन गड्ढों में फंसकर खराब हो रहे हैं।
कामचलाऊ मरम्मत पड़ी भारी
सारंगपोसी के ग्राम प्रधान भक्तु मार्डी ने स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क की दयनीय हालत को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व में विरोध-प्रदर्शन किया था और भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की मांग की थी।
हालांकि, प्रशासन और संबंधित विभाग ने स्थायी समाधान निकालने के बजाय गड्ढों में महज गिट्टी और डस्ट डालकर खानापूर्ति कर दी।
इसके तुरंत बाद दोबारा भारी वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि बारिश के बाद सड़क की स्थिति पहले से भी अधिक बदतर हो गई।
प्रशासन से तत्काल मरम्मत की गुहार
ग्राम प्रधान के अनुसार, यह सड़क जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली प्रमुख जीवनरेखा है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन, एम्बुलेंस और स्कूली बसें गुजरती हैं।
वर्तमान में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए भी यहाँ से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित विभाग ने तुरंत पक्की मरम्मत नहीं कराई और भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
