यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 27, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मुरुप में दहकते अंगारों पर दौड़ेंगे भक्त
जागरण संवाददाता, सरायकेला : प्रखंड के मुरुप स्थित देवी दुर्गा मां के प्रति भक्तों की आस्था कहिए

जागरण संवाददाता, सरायकेला : प्रखंड के मुरुप स्थित देवी दुर्गा मां के प्रति भक्तों की आस्था कहिए या देवी दुर्गा की असीम कृपा लेकिन यह सच है कि यहां माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई आकर्षक व हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। यह आस्था व भक्ति आज नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है जो आज भी जारी है।
मुरुप में स्थापित माता देवी दुर्गा की पूजा विधिवत दशमी से 20 दिन पहले शुरू हो जाती है। दशमी के बाद एकादशी के दिन यहां माता की भव्य पूजा अर्चना की जाती है। एकादशी के दिन एक अक्टूबर को अग्नि कुंवारी की पूजा अर्चना की जाएगी। इसके तहत मंदिर में 20 फीट लंबा व दो फीट चौड़ा गढ्डा खोदकर अग्निकुंड बनाया गया है। इसमें भक्त देवी को प्रसन्न करने के लिए दहकते अंगारों पर नंगे पांव दौड़ेंगे। देवी दुर्गा की असीम भक्ति की कृपा से इन भक्तों के पांव में छाले तक नहीं पड़ते हैं। मन्नत के अनुसार महिला व पुरुष अपने अराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए कंटीले झाड़ियों पर लेटकर भक्ति की परीक्षा देते हैं। भक्तों के करतब को देखने के लिए प्रतिवर्ष यहां पड़ोसी जिला समेत आसपास के हजारों भक्त जुटते हैं। यहां देवी दुर्गा की पूजा देउरी द्वारा की जाती है।
मंदिर में कई साल से पूजारी के रूप में रामनाथ होता, लखिंद्र प्रधान, कुथलू प्रधान व गौर दास द्वारा पूजा कराई जा रही है। पुजारी रामनाथ होता ने बताया कि माता की असीम के कारण माता के दरबार में भक्तों द्वारा मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। नंगे पांव अंगारों पर चलने के बावजूद भक्तों के पांव में छाला तक नहीं पड़ती है।
