सरायकेला, जागरण संवाददाता। सरायकेला-खरसावां जिले के सरायकेला प्रखंड के मानिक बाजार स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भवन में चार कमरे हैं। चारों कमरों की छत क्षतिग्रस्त हो गई है। जर्जर छत होने के कारण छात्रों की जान जोखिम में है। बच्चे बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। एक ओर सरकार जहां विद्यालयों को हाईटेक करने के लिए हर तरह की सुविधाओं से लैस कर रही है, वहीं कुछ विद्यालय ऐसे हैं, जहां बच्चों को बैठने के लिए कमरे, पढ़ने के लिए बेंच-डेस्क एवं पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।

यही हाल उत्क्रमित मध्य विद्यालय मानिक बाजार का है। यहां बच्चे बरामदे में बैठकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। विद्यालय में तीन भवन है। इसमें कुल छह वर्ग कक्ष है। इनमें दो भवन को काफी साल पहले निर्माण कराया गया है। इसकी छत जर्जर होने के कारण प्लास्टर झड़ने लगा है। चार कमरों में बच्चों को बैठाकर पढ़ाने में खतरे की आशंका है। इस कारण तीन साल से बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।

विद्यालय भवन की जर्जर एवं क्षतिग्रस्त छत की सूचना विभाग को है, इसके बावजूद अभी तक इस दिशा में विभागीय पहल नहीं हुई है। बच्चे तीन साल से बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कुछ दिन पहले उपायुक्त छवि रंजन ने विद्यालय भवन का निरीक्षण किया परंतु अभी तक जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हुआ है। मानिक बाजार उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक कुल १५६ बच्चे नामांकित हैं। इनमें से कक्षा एक से पांच तक ७२ एवं कक्षा छह से आठ तक ८४ बच्चे नामांकित हैं।

तीन शिक्षक पढ़ा रहे १५६ बच्चों को 

विद्यालय में दो सरकारी एवं तीन पारा शिक्षक पदस्थापित हैं। इनमें से प्रधानाध्यापिका अनिमा अंशीला होरो विशेष अवकाश पर हैं। पारा शिक्षक सुरेश दास नृपराज राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय में प्रतिनियोजित हैं। वर्तमान सरकारी शिक्षक सुभाष चंद्र कैवर्त एवं पारा शिक्षक अक्टूबर कालिंदी व रवि पड़िहारी समेत तीन शिक्षक १५६ बच्चे को शिक्षा दे रहे हैं।

चापाकल का पानी पीने लायक नहीं 

विद्यालय में पेयजल की किल्लत है। विद्यालय परिसर में लगाया गया चापाकल का पानी पीने लायक नहीं है। मध्याह्न भोजन के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है। बच्चे विद्यालय के बाहर जाकर अपनी प्यास बुझाते हैं। तीन माह पहले विद्यालय में हैंडवॉश यूनिट लगाया गया परंतु दो दिन तक चलने के बाद बंद हो गया। इसी विद्यालय में सरायकेला विधान सभा का मतदान केंद्र भी है।

एक भवन के दो कमरे ही ठीक

विद्यालय में तीन भवन हैं। एक भवन के दो कमरे ठीक है। वहां कक्षा सात व आठ के बच्चों को पढ़ाया जाता है। कक्षा एक से कक्षा पांच तक के बच्चों को अलग-अलग दो बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। विद्यालय भवन के जीर्णोद्धार के लिए प्राक्कलन बनाया गया था, परंतु किसी कारणवश अभी तक काम नहीं शुरू हुआ है। चार साल से दोनों भवन के चार कमरे क्षतिग्रस्त हैं। बच्चे बरामदे में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जाड़े में तो किसी तरह बच्चे बरामदे में पढ़ लेते हैं परंतु गर्मी व बरसात में बच्चों को परेशानी होती है। छत गिरने से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। चारों क्षतिग्रस्त कमरे को बंद कर दिया गया है।

-सुभाष चंद्र कैवर्त, सहायक शिक्षक

पानी की किल्लत

विद्यालय में पानी की किल्लत है। बाहर जाकर बच्चे पानी पीते हैं। विद्यालय के चापाकल का पानी पीने योग्य नहीं है। चापाकल से गंदा पानी निकलता है। इसे बच्चे नहीं पी पाते हैं। विद्यालय में तीन माह पहले हैंडवॉश यूनिट लगाया गया। इसका कनेक्शन पुराना चापाकल से किया गया। दो दिन तक हैंडवॉश यूनिट चला इसके बाद बंद हो गया। मध्याह्न भोजन के लिए बच्चे बाहर चापाकल में जाकर हाथ-मुंह धोते हैं। उस चापाकल पर पहले से लंबी कतारें लगी रहती है।

-अक्टूबर कालिंदी, पारा शिक्षक

ये कहते उपायुक्त

विद्यालय भवन ठीक है। छत कुछ क्षतिग्रस्त हो गया है। क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है।

छवि रंजन, उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप