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स्विटजरलैंड पहुंचा साहिबगंज की बर्ड सेंचुरी में हिंसा का मामला, पूर्व MLA ने झारखंड से दिल्ली तक पहुंचाई आवाज

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:26 PM (IST)

साहिबगंज के उधवा रामसर साइट सह बर्ड सेंचुरी में हुई तोड़फोड़ और वनकर्मियों पर हमले का मामला स्विटजरलैंड तक पहुंच ...और पढ़ें

उधवा रामसर साइट सह बर्ड सेंचुरी। फाइल फोटो

 उधवा रामसर साइट सह बर्ड सेंचुरी। फाइल फोटो

HighLights

  1. उधवा बर्ड सेंचुरी में तोड़फोड़ का मामला अब स्विटजरलैंड तक पहुंचा।

  2. वनकर्मियों पर हमला, गेस्ट हाउस में तोड़फोड़ से पर्यटन को धक्का।

  3. पूर्व विधायक अनंत ओझा ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों को घटना बताई।

डॉ. प्रणेश, साहिबगंज। उधवा रामसर साइट सह बर्ड सेंचुरी में पिछले दिनों पास के ग्रामीणों द्वारा की गयी तोड़फोड़ की बात स्विटजरलैंड तक पहुंच गयी है। संभव है अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी यह मामला उठ जाए।

राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा ने 10 दिसंबर को हुई घटना से प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्री तथा मुख्यमंत्री को अवगत कराया है। ऐसे में इस मामले में कड़ी कार्रवाई की संभावना प्रबल हो गयी है।

इस मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। एक प्राथमिकी राधानगर थाने में दर्ज करायी गयी है जिसमें 13 नामजद व सौ अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है, तो दूसरी प्राथमिकी वन विभाग ने खुद की है, जिसमें तीन लोगों को आरोपित बनाया गया है।

इस तरह की घटनाओं से बर्ड सेंचुरी को पर्यटन स्थल स्थल के रूप में विकसित करने की वन विभाग के प्रयासों को भी धक्का लगा है। गत 10 दिसंबर काे आसपास के कुछ लोग बर्ड सेंचुरी में मछली मार रहे थे।

वन कर्मियों ने मना किया तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर उनपर हमला कर दिया जिनमें दो वन पदाधिकारी सहित नौ कर्मी घायल हो गए। ग्रामीणों ने वन विभाग के गेस्ट हाउस में भी तोड़फोड़ की।

राज्य का इकलौता पक्षी अभ्यारण्य

उधवा में राज्य का इकलौता पक्षी अभ्यारण्य है। यह करीब 1396 एकड़ में फैला हुआ है। सर्दियों के मौसम में यहां विदेशी पक्षी आते हैं। कुछ दिन यहां रहने के बाद लौट जाते हैं। 1991 में इसे पक्षी अभ्यारण्य का दर्जा मिला। पहले यह हजारीबाग वन प्रमंडल के अधीन था जिस वजह से इसका रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा था।

इसकी भूमि का लगातार अतिक्रमण कर अवैध निर्माण किया जा रहा था। 2021 में इसे साहिबगंज वन प्रमंडल को स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद इसके संरक्षण पर फोकस किया गया। इसके परिणामस्वरूप यहां प्रवासी पक्षियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई। वर्तमान में यहां पक्षियों की 150 प्रकार की प्रजाति आती है।

इनमें 50 प्रकार की प्रजाति विदेशों तो 50 प्रकार की प्रजाति हिमालयन क्षेत्र से आती है। पक्षियों की 50 प्रजाति स्थानीय है। ये पक्षियां झील में पायी जाने वाली विविध प्रकार की मछलियों के शिकार के लिए आती है।

अगर झील में मछलियां नहीं होंगी तो पक्षी भी नहीं आएंगे। इसे देखते हुए यहां मछलियों को मारने पर रोक है। विदेशी पक्षियों की संख्या को देखते हुए पिछले साल इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर साइट का दर्जा दिया गया। अब पक्षियों व पर्यावरण पर शोध करने वाले लोग यहां पहुंचने लगे हैं।

भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है जिसके मद्देनजर यहां कई तरह के काम कराए जा रहे हैं लेकिन इस तरह की घटनाओं से पर्यटक यहां आने से परहेज करेंगे।

इको सेंसेटिव जोन

2019 में इस क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया गया। ऐसे में झील के दो किलोमीटर के दायरे में कोई उद्योग नहीं लगाया जा सकता है। इसके अलावा झील के वातावरण को प्रभावित करने वाला कोई काम वहां नहीं कराया जा सकता है लेकिन अब भी बड़े पैमाने पर वहां अवैध निर्माण होने की बात सामने आ रही है।

राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से मस्जिद का भी निर्माण कराया जा रहा है। अतिक्रमण के मामले को तत्कालीन विधायक अनंत ओझा ने विधानसभा में उठाया था जिसके बाद सरकार ने वहां अवैध निर्माण पर रोक लगा दी थी।

कुछ दिनों तक निर्माण कार्य बंद रहा लेकिन पुन: चोरी छिपे वहां निर्माण की बात सामने आ रही है। वन कर्मियों का कहना है कि अवैध कार्याें का विरोध करने पर उनलोगों को टार्गेट किया जाता है।

पिछले दिनों हुई घटना में 13 नामजद व सौ अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया लेकिन वन विभाग के कर्मियों ने जिस व्यक्ति को पकड़ कर पुलिस को सौंपा था उसके अलावा अब तक किसी और की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पिछले दिनों हुई वन कर्मियों के साथ हुई मारपीट व तोड़फोड़ की घटना से इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोशिशों को धक्का लगा है। तोड़फोड़ से वन विभाग को आर्थिक क्षति तो हुई ही है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्यटक यहां आने से परहेज करेंगे। अगर यह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होता है तो इसका फायदा स्थानीय लोगों को ही मिलेगा। -प्रबल गर्ग, डीएसओ, साहिबगंज