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SIR के बीच साहिबगंज में आवासीय प्रमाण पत्र का फिर बदला फॉर्मेट, गलत वंशावली पर फंसेंगे मुखिया

Published: Wed, 09 Sep 2026 07:43 AM (GMT+05:30)

साहिबगंज के उधवा में जाति व निवास प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को बार-बार फॉर्मेट बदलने और हजारों आवेदन लंबित होने से भारी परेशानी हो रही है।

साहिबगंज में मतदाता सूची की जांच। (प्रतीकात्मक फोटो)

साहिबगंज में मतदाता सूची की जांच। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. उधवा में जाति-निवास प्रमाण पत्र बनवाने में भारी दिक्कतें।

  2. बार-बार बदल रहे फॉर्मेट, हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं।

  3. गलत वंशावली सत्यापन पर मुखिया होंगे जिम्मेदार।

संवाद सहयोगी, उधवा (साहिबगंज)। झारखंड के साहिबगंज में बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दाैरान घुसपैठिए भी खुद को मतदाता बनाने में जुट हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकीर के रवि कुमार के दाैरे के बाद एक बार फिर निवास प्रमाण पत्र का नया फार्मेट जारी किया गया है।

उधवा में एसआइआर प्रक्रिया में जाति तथा निवास प्रमाण पत्र बनवाने में जरुरतमंदों के पसीने छूट रहे हैं। बार- बार जाति तथा निवास प्रमाण पत्र के फार्मेट बदले जा रहे हैं। अंचलाधिकारी आशीष कुमार मंडल ने एसआइआर के लिए आवेदनकर्ताओं पर विचार करने का निर्णय लिया था। इसके बाद भी आवेदन पत्र को निपटाने में अंचल कार्यालय फेल हो गया था।

हजारों आवेदन लंबित रहने से एसआइआर प्रक्रिया बाधित हो रही थी। राजनीतिक दलों की आपत्ति तथा जिला प्रशासन के निर्णय के बाद सिर्फ एसआइआर के लिए आफलाइन निवास तथा जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रमाण पत्र पर सिर्फ एसआइआर के लिए मान्य तथा मात्र तीन माह के लिए वैध माना गया था। लेकिन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार ने इसे गलत बताया।

ऐसे में अंचलाधिकारी ने तीसरी बार मंगलवार को प्रमाण पत्र बनवाने हेतु नया फार्मेट जारी किया। इसमें सभी प्रयोजन के लिए प्रमाणपत्र बनाने का उल्लेख है। ऐसे में जरुरतमंदों को अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है और उसे ये पता नहीं कि इस बार भी उसका काम होगा या नहीं।

उधवा अंचल की 26 पंचायत में एसआइआर प्रक्रिया के लिए लोगों को जाति तथा निवास प्रमाण पत्र बनवाने की आवश्यकता है लेकिन मात्र दो राजस्व कर्मचारी हैं। ऐसे में अंचलाधिकारी उधवा ने एक नया फरमान जारी कर दिया है कि वंशावली सत्यापन मुखिया तथा वार्ड सदस्य को करना है और गलत होने पर दोषी मुखिया को माना जाएगा।

ऐसा प्रावधान पहले नहीं था जिससे मुखिया द्वारा भी काफी सावधानी बरती जा रही है जिससे प्रमाण पत्र हासिल करना बहुत मुश्किल हो गया है।