Shravani Mela 2026: शिवगादी धाम में श्रावणी मेले की तैयारी पूरी; जानें छह सोमवार का महत्व
बरहेट के बाबा गाजेश्वर नाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जहां बंगला और हिंदी पंचांगों के विशेष संयोग से डेढ़ महीने तक मेला चलेगा।

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HighLights
डेढ़ महीने चलेगा श्रावणी मेला, छह सोमवार का संयोग।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
जर्जर सड़कें और अतिक्रमण बन सकते हैं बड़ी बाधा।
संस, बरहेट (साहिबगंज)। झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड स्थित उत्तरवाहिनी गंगा के समान पवित्र और प्रसिद्ध बाबा गाजेश्वर नाथ धाम (शिवगादी) में श्रावणी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस वर्ष बंगला और हिंदी दोनों पंचांगों के विशेष संयोग के कारण सावन का मेला लगभग डेढ़ महीने तक चलेगा। इस अद्भुत संयोग के कारण श्रद्धालुओं को सावन माह में कुल छह सोमवारों को बाबा का जलाभिषेक करने का पावन अवसर मिलेगा, जिससे मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
दो पंचांगों का अनूठा संयोग: जानें तिथियां
शिवगादी मंदिर के पुरोहित सौरभ मिश्रा और पवन झा ने बताया कि इस बार बंगला सावन का शुभारंभ 18 जुलाई से हो रहा है, जो 10 अगस्त तक चलेगा। वहीं, हिंदी पंचांग के अनुसार सावन माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा।
दोनों सावन के इस अनूठे मेल से सावन की अवधि विस्तृत हो गई है और शिवभक्तों में इसे लेकर भारी उत्साह है। मेले के सफल आयोजन को लेकर शिवगादी प्रबंध समिति की बैठक सोमवार देर शाम समिति के अध्यक्ष रूपक कुमार साह की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
बैठक में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए समिति के सदस्यों के बीच कार्य और जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया। समिति की ओर से श्रद्धालुओं और कांवरियों के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
कांवरियों के लिए गर्म पानी, दवाएं और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रहेगी। महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग स्नानघर और अस्थाई शौचालयों का निर्माण कराया गया है।
सबसे अधिक भीड़ वाले दिनों (रविवार और सोमवार) को कतारबद्ध तरीके से सुरक्षित पूजा-अर्चना की व्यवस्था की जाएगी। बरहेट क्षेत्र में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण मंगलवार सुबह से बाबा गाजेश्वर नाथ धाम की गुफा के बाहर विशाल पहाड़ से आकर्षक प्राकृतिक झरने का गिरना शुरू हो गया है।
चारों ओर फैली खूबसूरत हरियाली और इस मनमोहक झरने को देखकर शिवगादी पहुंचने वाले श्रद्धालु और पर्यटक बेहद खुश हैं और झरने में स्नान कर सुकून महसूस कर रहे हैं।
तीसरी आंख की निगरानी में रहेगी सुरक्षा व्यवस्था
मेले के दौरान असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने और भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा का कड़ा खाका तैयार किया गया है। मंदिर की मुख्य गुफा के अंदर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
इसके अलावा मंदिर परिसर के बाहर, सीढ़ी मार्ग, धर्मशालाओं, मुख्य प्रवेश द्वार और दान काउंटर सहित पूरे मेला परिसर में दर्जनों सीसीटीवी कैमरों से समिति द्वारा विशेष निगरानी रखी जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जिला पुलिस बल के साथ भारी संख्या में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।
500 सोलर लाइटों से जगमगाया शिवगादी मार्ग
झामुमो के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा की पहल पर शिवगादी धाम से लेकर बरहेट तक के मार्ग को लगभग 500 से अधिक सोलर स्ट्रीट लाइटों से पाट दिया गया है।
बरहेट तीनमुहानी से हडवाड़ीह, गोपलाडीह, कदमा और तलबड़िया चौक तक लगी इन सोलर लाइटों से रात के समय आने-जाने वाले भक्तों को अंधेरे की समस्या से मुक्ति मिलेगी। स्थानीय लोगों ने इस पहल की काफी सराहना की है।
झारखंड, बिहार और बंगाल से जुटते हैं लाखों श्रद्धालु
शिवगादी धाम में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि झारखंड के पाकुड़, गोड्डा, दुमका, रांची सहित अन्य जिलों और पड़ोसी राज्य बिहार के भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, पटना से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल के धुलियान, मालदा, कालियाचक, रामपुरहाट, कोलकाता और बर्दवान क्षेत्रों से हजारों-हजार शिवभक्त हर साल यहां मत्था टेकने आते हैं।
जर्जर सड़क और अतिक्रमण बन सकते हैं बड़ी बाधा
एक तरफ जहां प्रबंध समिति अपनी तैयारियों में जुटी है, वहीं सरकारी उदासीनता भक्तों की राह मुश्किल कर सकती है। बरहेट-बरहरवा मुख्य सड़क पर स्थित शिवगादी चौक की हालत बेहद जर्जर है।
पथ निर्माण विभाग द्वारा अब तक इस मुख्य मार्ग की मरम्मत शुरू नहीं की गई है, जिससे कांवरियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इसके अलावा शिवगादी चौक के दोनों ओर अतिक्रमण के कारण रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है।
वैकल्पिक मार्गों जैसे खेरवा बाईपास रोड (जो डुमरा, खिजुरखाल होते हुए हरिणचरा बोरियो जाता है) और डुमरिया से बरहेट आने वाले बाईपास रोड पर भी जगह-जगह बड़े गड्ढे उभरे हैं, जिन्हें तुरंत दुरुस्त करने की जरूरत है।
