यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 21, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand News: DSE के एक्शन से पारा शिक्षकों में मचा हड़कंप, नौकरी जाने का खतरा
साहिबगंज जिले में पारा शिक्षकों की बहाली में अनियमितताएं पाई गईं हैं जहां कई शिक्षकों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार ...और पढ़ें

HighLights
- प्रमाणपत्रों की ठीक से जांच हो तो निकलेंगे सौ से अधिक शिक्षक
- सूची बनाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की तय होगी जिम्मेदारी
जागरण संवाददाता, साहिबगंज। जिले में पारा शिक्षकों की बहाली में व्यापक पैमाने पर अनियमितता हुई। लोग जहां-तहां से प्रमाणपत्र लेकर बहाल हो गए। चूंकि यह बहाली प्रखंड स्तर पर हुई थी और मानदेय भी मात्र एक हजार रुपया था। इस वजह से प्रारंभ ने लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में जहां-तहां से शिकायत आने लगी।
फर्जी प्रमाणपत्र वाले शिक्षकों को हटाने का आदेश
फर्जी संस्थानों का प्रमाणपत्र जमा करने वाले शिक्षकों को हटाने का आदेश कई साल पूर्व आया। इस क्रम में कई शिक्षकों को हटाया भी गया, लेकिन सेटिंग वाले लोग बने रह गए। करीब दो साल पूर्व फर्जी संस्थान का प्रमाणपत्र जमा करने वाले 88 शिक्षकों की सूची बनाई गई थी, लेकिन वह सूची भी समय के साथ-साथ छोटी होती चली गई।
सूत्रों की माने तो शिक्षा परियोजना के ही कुछ कर्मी इस सेटिंग में शामिल हैं। वही लोग प्रमाणपत्र की भी व्यवस्था करते हैं। करीब दो साल पूर्व परियोजना के एक कर्मी के लेनदेन का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। उन्हें हटाने की बात थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों से सेटिंग की वजह से वह आज भी जमे हुए हैं।
वैसे इस बार मामला थोड़ा मुश्किल लग रहा है, क्योंकि डीएसई कुमार हर्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर अब कोई भी शिक्षक फर्जी संस्थानों के प्रमाणपत्र पर कार्यरत मिला तो सूची बनाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
नौकरी करते हुए कर लिया इंटर
पारा शिक्षकों की बहाली 2002 से 2010 के बीच हुई। इनमें अधिकतर गड़बड़ी 2005-06 तक की है। तब मैट्रिक पर ही बहाली हुई। बाद में उनके लिए इंटर पास करना अनिवार्य कर दिया गया। ऐसे में शिक्षकों ने जहां-जहां से प्रमाणपत्र खरीद लिया।
कई शिक्षक दलालों के चक्कर में पड़ गए। कई शिक्षकों ने तो ड्यूटी करते हुए नियमित कोर्स में दाखिला ले लिया और इंटरमीडिएट पास का प्रमाणपत्र जमा कर दिया।
परियोजना कर्मियों की मिलीभगत से ऐसे लोग अब भी कार्यरत हैं। सूत्रों की माने तो आइएससी के बदले आइकाम की डिग्री देकर एक शिक्षक बहाल हो गया। कई शिक्षकों के पास तो इंटर की चार-चार डिग्री है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी राजमहल व उधवा में है।
जिन संस्थानों को फर्जी घोषित किया जा चुका है उसका प्रमाणपत्र जमा करने वाले शिक्षकों को हर हाल में हटाया जाएगा। अगर इसके बाद भी फर्जी घोषित संस्थानों के प्रमाणपत्र पर कोई कार्य करते मिलता है तो सूची बनाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
कुमार हर्ष, जिला शिक्षा अधीक्षक, साहिबगंज
