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बिना मुस्लिम आबादी वाले गांव में 335 लोगों को पेंशन, साहिबगंज में फर्जी लाभार्थियों को मिल रहा था लाभ

Published: Mon, 15 Jun 2026 05:05 PM (IST)

बोरियो प्रखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है, जहां 7647 फर्जी लाभार्थियों को प्रतिमाह 76.47 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा था।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

HighLights

  1. बोरियो में 7647 फर्जी लाभार्थियों को मिल रहा था पेंशन।

  2. बिशनपुर में मुस्लिम न होने पर भी 335 को पेंशन।

  3. बीडीओ ने शुरू की मामले की विस्तृत जांच।

संवाद सहयोगी, बोरियो (साहिबगंज)। बोरियो प्रखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हुई गड़बड़ियों की परत-दर-परत अब खुल रही है।

इस दौरान यह बात सामने आयी है कि केवल बोरियो प्रखंड में 7647 लोगों को फर्जी तरीके से पेंशन दी जा रही थी। प्रत्येक को एक हजार रुपया प्रतिमाह पेंशन मिलती थी।

ऐसे में केवल बोरियो में सरकार को 76 लाख 47 हजार रुपये का चूना प्रतिमाह लगाया जा रहा था। वैसे यह संख्या व राशि घट-बढ़ सकती है।

इस प्रखंड की विशनपुर पंचायत में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है लेकिन यहां के पते पर 335 लोगों को विवेकानंद नि:शक्तता पेंशन का लाभ दिया जा रहा था।

बोरियो बीडीओ द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में कहा गया है कि 30 मई 26 को तेलो पंचायत सचिव बेला हांसदा ने उन्हें सूचित किया कि बड़ा बियासी की महिला तारा देवी को वृद्धा पेंशन का लाभ दिया जा रहा है जबकि आधार कार्ड में उसकी जन्म तिथि एक जनवरी 1981 अंकित है।

मतदाता पहचान पत्र में 24 मई 22 को उसकी उम्र मात्र 42 वर्ष अंकित है। उन्होंने यह भी बताया कि उसे वृद्धा पेंशन के लिए उसने अनुशंसा भी नहीं की है। इसके बाद बीडीओ ने मामले की जांच शुरू की तब मामले का खुलासा हुआ।

पेंशन में धांधली

इसी क्रम में छह जून को विशनपुर के पंचायत सचिव ने बताया कि रिकॉर्ड के अनुसार उनके यहां के 335 लोगों को विवेकानंद नि:शक्तता पेंशन का लाभ दिया जा रहा है लेकिन उनमें से अधिकतर लोग पंचायत क्षेत्र के नहीं हैं।

बताया जाता है कि इस गांव में अधिकतर आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं लेकिन लाभुकों की सूची में अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।

इसके बाद अधिकारियों का माथा ठनका। छोटा कुसमी गांव के पते पर भी कई लोगों को वृ़द्धा पेंशन की स्वीकृति गलत तरीके से दी गयी।

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