जागरण संवाददाता, साहिबगंज : बिहार व उत्तर प्रदेश में गंगा नदी से कोरोना संक्रमितों का शव मिलने के बाद इन दिनों जिले के लोगों ने नदी की मछलियों को खाना कम दिया है। इस वजह से इन मछलियों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। रेट भी काफी कम हो गया है। इस वजह से कई मछुआरों ने जाल लगाना भी छोड़ दिया है। संक्रमण की आशंका से नियमित रूप से गंगा में स्नान करने वाले कुछ लोगों ने नहाना भी छोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार जिले में मछुआरों का करीब 20 समूह गंगा में नियमित रूप से मछली मारने का काम करता है। करीब 15-20 क्विटल मछली प्रतिदिन गंगा से निकाली जाती है। हालांकि, मई से जुलाई तक का महीना मछलियों के प्रजनन का होता है। इसलिए इस अवधि में गंगा में मछली मारने पर कानूनी रूप से रोक रहती है लेकिन इसके बाद भी चोरी-छिपे मछुआरे मछली मार लेते थे लेकिन इन दिनों मांग कम होने से उन्होंने यह छोड़ दिया है। शुक्रवार को राजमहल में काली घाट पर एक शव होने की सूचना पर गंगा नहाने गए कई लोग बिना नहाए लौट गए थे। बाद में थाना प्रभारी ने जाकर जांच-पड़ताल की तो वह एक मवेशी का निकला। इसके बाद भी शनिवार को गंगा नहाने वाले लोग उधर नहीं गए।

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गंगा की मछलियों की डिमांड इन दिनों घट गई है। खरीदार तालाब की मछलियों की खोज कर रहे हैं। डिमांड घटने की वजह से कई मछुआरों ने गंगा में जाल गिराना भी छोड़ दिया है। कुछ दिन पूर्व तक जिले में 15-20 क्विटल मछली प्रतिदिन गंगा से निकाली जाती थी और वह तुरंत बिक जाती थी। इस वजह से मछुआरों की स्थिति दयनीय हो गई है।

अरुण कुमार चौधरी, निदेशक, झासकोफिश रांची सह अध्यक्ष मछुआ सोसाइटी साहिबगंज

Edited By: Jagran