साहिबगंज : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक उच्चस्तरीय टीम बुधवार की शाम यहां पहुंची। टीम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सदस्य रीता साहा, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के राजीव रंजन व दुमका स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी रवींद्र कुमार शामिल हैं। टीम के सदस्यों ने गुरुवार को बाकुडीह की कुछ खदानों व क्रशरों की जांच की। बताया जाता है कि टीम तीन दिनों तक यहां रहेगी और क्रशरों व खदानों की जांच करेगी। इसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी। गौरतलब हो कि प्रदूषण नियंत्रण मानकों का उल्लंघन करने पर प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जिले के 293 क्रशर व पत्थर खदानों पर पांच करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया था। जुर्माना जमा करने के लिए व्यवसायियों को एक माह का समय दिया गया था। एक माह के अंदर राशि जमा नहीं करने पर 12 फीसद प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सभी व्यवसायियों को निर्धारित मानकों को भी पूरा करने को भी कहा था। जिले के सौ से अधिक व्यवसायियों को पत्र भेजा गया था। किसी पर डेढ़ लाख तो किसी पर दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि, किसी भी पत्थर व्यवसायी ने जुर्माना अदा नहीं किया। कुछ लोग तो इसके खिलाफ कोर्ट चले गए हैं। इससे पूर्व 11 से 17 नवंबर 2019 तक प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की एक टीम जिले में थी। इस दौरान टीम के सदस्यों ने घूम-घूम कर पत्थर खदानों व क्रशरों की जांच की थी। प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उल्लंघन कर चलने वाले 293 क्रशर व पत्थर खदानों के संचालकों को नोटिस भेज अपना पक्ष रखने को कहा था। सभी ने रांची में प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के मुख्यालय में पहुंचकर अपना-अपना पक्ष रखा। व्यवसायियों की बातों से असंतुष्ट होकर सभी पर जुर्माना लगाया गया था। यहां के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जिले में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उल्लंघन कर क्रशर व पत्थर खदान संचालन की शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में की थी। इसकी सुनवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कोलकाता बेंच में चल रही थी। पिछले दिनों उसे ट्रिब्यूनल की दिल्ली बेंच में स्थानांतरित कर दिया गया। वहां 21 नवंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

Posted By: Jagran

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