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अयोध्या में बढ़ेगा संजय भरतिया की कला का आकर्षण, राम कथा संग्रहालय में लगेगी तांबे की तारों से बनी कलाकृति

Published: Mon, 14 Sep 2026 11:10 AM (IST)

Sanjay Bhartia's Wire Art: संजय भरतिया की तांबे के तारों से बनी अनूठी कलाकृति अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में प्रदर्शित की जाएगी।

साहिबगंज के संजय भरतिया की अनूठी तार कला अयोध्या के राम कथा संग्रहालय की बढ़ाएगी शोभा। (फोटो सौजन्य)

साहिबगंज के संजय भरतिया की अनूठी तार कला अयोध्या के राम कथा संग्रहालय की बढ़ाएगी शोभा। (फोटो सौजन्य)

HighLights

  1. संजय भरतिया की तार कला अयोध्या संग्रहालय में प्रदर्शित होगी।

  2. यह कलाकृति तांबे के महीन तारों से बनाई गई है।

  3. भरतिया की कला वाराणसी और उज्जैन में भी स्थापित है।

जागरण संवाददाता, साहिबगंज। तांबे की महीन तारों से रची एक अनूठी कलाकृति अब अयोध्या में भगवान श्रीराम की गाथा कहेगी। झारखंड के साहिबगंज के व्यवसायी सुनील भरतिया और वार्ड पार्षद सुशील भरतिया के बड़े भाई संजय भरतिया की बनाई लाइव वायर आर्ट को अयोध्या में बन रहे अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

संजय भरतिया की उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर

अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किए जा रहे इस संग्रहालय में संजय भरतिया की कलाकृति का चयन उनके कला कौशल को मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है। संजय भरतिया की इस उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है। संजय भरतिया फिलहाल कोलकाता में रहते हैं।

अयोध्या में बन रहा अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय की तर्ज पर अत्याधुनिक और भव्य रूप में विकसित किया जा रहा है।

यहां अत्याधुनिक तकनीक के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन और उनकी गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है। संग्रहालय में होलोग्राम और सेवन-डी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे आगंतुकों को श्रीराम से जुड़ी कथाओं और प्रसंगों का अनूठा अनुभव मिल सकेगा।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के निर्देश पर राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद कोलकाता के महानिदेशक की विशेष टीम ने गहन परीक्षण एवं सर्वेक्षण उपरांत भरतिया की कलाकृति को संग्रहालय में लगाने का निर्णय लिया।

रेलवे स्कूल से की पढ़ाई

संजय भरतिया का जन्म वर्ष 1955 में साहिबगंज में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रेलवे उच्च विद्यालय तथा उच्च शिक्षा साहिबगंज महाविद्यालय से हुई। पढ़ाई के साथ ही उन्होंने साधारण उपकरणों की मदद से तांबे की तार के माध्यम से अलग-अलग आकृतियां तैयार करने की अनोखी कला विकसित की।

हालांकि, बाद में वह एक निजी कंपनी में नौकरी करने लगे तब इसे विराम दे दिया लेकिन सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद पुन: इस कला को विकसित करने में जुट गए। धीरे-धीरे उनकी यह कला राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने लगी।

भरतिया की कलाकृति वाराणसी और उज्जैन में भी लग चुकी है 

उनके द्वारा निर्मित कलाकृति काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी, महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में भी लगी हुई है। बताया जाता है कि इस कला के वह इकलौते कलाकार हैं।

अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में उनकी कलाकृति का चयन उनके लंबे कला सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। संजय भरतिया ने अपनी कलाकृति के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु भी आवेदन किया है।