डॉ. प्रणेश, साहिबगंज

प्रोन्नति के एक मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना करने पर शिक्षाधिकारियों पर 41 लाख रुपए का भारी भरकम जुर्माना लगाया गया है। छह मार्च 2020 को मामले की सुनवाई करते हुए एचसी मिश्रा की बेंच ने यह जुर्माना लगाया। यहां के जिला शिक्षा अधीक्षक को आदेश का अनुपालन करते हुए 17 अप्रैल को सशरीर अदालत में पेश होने को कहा गया है। उन्हें किसी भी तरह की सजा के लिए तैयार रहने को कहा गया है। अदालत के आदेश की कापी मिलने के बाद यहां हड़कंप मच गया है। आदेश के अनुपालन में शिक्षा विभाग के अधिकारी जुट गए हैं। बताया जाता है कि विष्णु कुमार दास सहित 41 प्राथमिक शिक्षक अपनी प्रोन्नति के लिए हाईकोर्ट गए थे। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने 2011 में संबंधित शिक्षकों को प्रोन्नति व आर्थिक लाभ देने का निर्देश दिया था। बताया जाता है कि शिक्षा विभाग ने प्रोन्नति तो दे दी लेकिन आर्थिक लाभ नहीं दिया। पुन: भूतलक्षी प्रभाव से आर्थिक लाभ के लिए सभी शिक्षक हाईकोर्ट गए। इस मामले की छह मार्च 2020 को सुनवाई हुई। इसमें दौरान सभी आवेदकों को भूतलक्षी प्रभाव से आर्थिक लाभ देने का आदेश अदालत ने दिया। अदालत ने सभी आवेदकों को क्षतिपूर्ति के रूप में एक-एक लाख रुपए का भुगतान करने को कहा है। कोर्ट जाने वाले कुछ शिक्षक रिटायर हो चुके हैं तो कुछ का निधन हो चुका है। जिन शिक्षक का निधन हो चुका है जुमाने की राशि उनके परिजनों को मिलेगी। उक्त राशि की वसूली इस कार्य में लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से होगी। अदालत ने उपायुक्त को इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी चिह्नित करने को कहा है। बताया जाता है कि जिस समय अदालत ने आर्थिक लाभ देने का आदेश दिया था उस समय जिला शिक्षा अधीक्षक के पद पर राम यतन राम पदस्थापित थे। उनके स्थानांतरण के बाद कुछ दिनों के लिए यमुना गिरी को प्रभार दिया गया। उसके बाद बाद करीब तीन-तीन साल तक सुरेंद्र पांडेय व जयगोविद सिंह डीएसई के पद पर पदस्थापित थे। सितंबर 2018 से प्रमोद प्रसाद जिला शिक्षा अधीक्षक के पद पर पदस्थापित हैं।

Posted By: Jagran

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