रांची, [कुमार गौरव]। World Rabies Day 2022 रैबीज एक विषाणुजनित संक्रामक जानलेवा बीमारी है। यह वायरस संक्रमित पशुओं के काटने और खरोंचने से मनुष्यों में फैलता है। इसकी रोकथाम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 28 सितंबर को विश्व रैबीज दिवस मनाया जाता है। रैबीज की रोकथाम की नींव फ्रांस के प्रसिद्ध जीव विज्ञानी लुई पाश्चर ने रखी थी। उन्होंने विश्व में रैबीज का पहला टीका विकसित किया था। उन्हीं की पुण्यतिथि पर प्रत्येक वर्ष विश्व रैबीज दिवस मनाया जाता है।

इस दिवस की शुरूआत 28 सितंबर 2007 को एलायंस फार रैबीज कंट्रोल एवं सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन, यूएसए तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई थी। डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2022 के लिए इस दिवस का थीम रैबीज फैक्ट, नाट फियर...रखा है। इसका उद्देश्य पूरे विश्व में वर्ष 2030 तक रैबीज बीमारी के प्रकोप को खत्म करना है। रैबीज बीमारी आमतौर पर पागल जानवरों के काटने से होती है। उक्त बातें बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के डीन वेटनरी डा सुशील प्रसाद ने विशेष बातचीत के क्रम में कही।

उन्होंने कहा कि झारखंड में हर साल 50 से ज्यादा मौतें कुत्ता काटने से हो रही हैं। रांची में हर साल इससे मौतें होती हैं। मौतें भले ही ज्यादा नहीं हैं, मगर कुत्ता काटने का इलाज बहुत महंगा है और रैबीज के टीके लगाने पर गुर्दों पर बुरा असर पड़ता है।

रैबीज बीमारी से देश में प्रत्येक साल 18 से 20 हजार लोगों की होती है मौत

डा सुशील प्रसाद ने बताया कि देश में प्रत्येक साल रैबीज बीमारी से 18 से 20 हजार लोगों की मौत होती हैं। इन मौतों में से अधिकतर बच्चे होते हैं। लोगों में जागरूकता में कमी और अक्सर चिकित्सा सुविधाओं के अभाव की वजह से मृत्यु होती हैं। आंकड़ों की माने तो मनुष्यों के लगभग 99 प्रतिशत मामलों में रैबीज की मुख्य वजह कुत्ते का काटना होता है।

कैसे फैलता है रैबीज...

रैबीज की मुख्य वजह न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स नामक वायरस होता है। यह विकार संक्रमित जानवर की लार द्वारा फैलता होता है। जो लार ग्रंथियों और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। आमतौर पर पागल जानवर के काटने और और खरोंचने से होता है। रैबीज के लक्षण दिखाई देने की समयावधि चार दिनों से लेकर दो वर्ष तक या कभी कभी उससे भी अधिक हो सकती है। इसलिए इसके घाव के वायरस को जल्द से जल्द हटाना जरूरी होता है। इसके घाव को तुरंत पानी और साबुन से धोना चाहिए। इसके बाद एंटीसेप्टिक का उपयोग करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण की संभावना को कम किया जा सके।

एक्सपर्ट व्यू: रैबीज का खतरा होने पर तुरंत टीका लगवा लेना चाहिए

बीएयू रांची के वेटनरी डीन डा सुशील प्रसाद का कहना है कि आमतौर पर इस बीमारी से मृत्यु का रिकार्ड तक नहीं होता है। अगर सड़क पर रहने वाले कुत्तों को भी पहले से रैबिज का टीका लगाया जाए तो राज्य को रैबिज मुक्त किया जा सकता है। इसके लिए सरकार के साथ विभिन्न निगम और एनजीओ को अपने अपने स्तर पर कार्य करने की जरूरत है। रैबीज का खतरा होने पर जीवन की सुरक्षा के लिए तुरंत रैबीज का टीका लगवा लेना चाहिए। यह कुत्तों के काटने से मनुष्य में फैलता है, इसलिए कुत्तों को भी रैबीज का टीका लगवाने की आवश्यकता है।

बीएयू में हरेक साल लगता है स्वास्थ्य शिविर

पालतू कुत्तों को हर साल एंटी-रैबीज वैक्सीन देने की आवश्यकता होती है। बीएयू के वेटनरी कालेज में रैबीज का निश्शुल्क टीकाकरण एवं पालतू पशुओं की स्वास्थ्य जांच विश्व रैबीज दिवस पर होती है। शिविर में रैबीज बीमारी पर जागरूकता अभियान, पालतु पशुओं का मुफ्त टीकाकरण शिविर, पालतु पशुओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच, कृमिनाशक दवा का वितरण एवं वेटनरी दवा विक्रेताओं के द्वारा प्रदर्शनी लगाई जाती है।

पालतू कुत्तों को हर साल देना चाहिए एंटी-रैबीज वैक्सीन

बता दें कि रैबिज डाग काट ले और 72 घंटों में एंटी-रैबीज वैक्सीन न लगाई जाए तो मौत तय है। दुनिया में इसका कोई इलाज नहीं है। सिर्फ बचाव ही इसका इलाज है। इसलिए पालतू कुत्तों को भी हर साल एंटी-रैबीज वैक्सीन देनी चाहिए।

कुलपति डा ओंकार नाथ सिंह।

विश्व रैबीज दिवस पर जागरुकता कार्यक्रम आज

बीएयू रांची के कुलपति डा ओंकार नाथ सिंह का कहना है कि विश्व रैबीज दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन पशु प्रेमी और आम लोगों को रैबीज बीमारी के प्रति जागरूक और अग्रिम सुरक्षा उपाय के लिए जाता है। यह मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम आज कालेज के क्लिनिकल काम्प्लेक्स विभाग में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा। जिसमें वेटनरी विज्ञानी एवं इंटर्नशिप से जुड़े वेटनरी स्टूडेंट्स भी शामिल होंगे। रैबीज बीमारी से बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। पालतु कुत्तों के मालिक, पशु प्रेमी एवं आम लोग इस कार्यक्रम में शामिल होकर लाभ ले सकते हैं।

Edited By: Sanjay Kumar

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