नक्सली, माओवादी और उग्रवादी में क्या अंतर है? आसान भाषा में समझें बड़ा फर्क
यह लेख नक्सली, माओवादी और उग्रवादी शब्दों के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है, जो अक्सर एक समान समझे ...और पढ़ें

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HighLights
नक्सली शब्द 1967 के नक्सलबाड़ी किसान आंदोलन से निकला।
माओवादी विचारधारा माओत्से तुंग के हिंसक संघर्ष पर आधारित है।
डिजिटल डेस्क, रांची। खबरों में आपने अक्सर पढ़ा होगा- नक्सली गिरफ्तार, माओवादी हमला या उग्रवादी संगठन की गतिविधि। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नक्सली, माओवादी और उग्रवादी में आखिर अंतर क्या होता है?
क्या तीनों एक ही हैं या इनके पीछे अलग-अलग इतिहास और विचार हैं? आम तौर पर इन शब्दों को एक ही समझ लिया जाता है, जबकि इनके इस्तेमाल का संदर्भ अलग-अलग है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन तीनों शब्दों में क्या फर्क है?
एक गांव से निकला 'नक्सली' नाम
नक्सली शब्द की जड़ें वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी इलाके में हुए किसान आंदोलन से जुड़ी हैं। जमीन और किसानों से जुड़े विवादों के बीच यह आंदोलन सामने आया था।
चारु मजूमदार, कानू सान्याल और जंगल संथाल जैसे नेता इस आंदोलन से जुड़े प्रमुख नाम थे। नक्सलबाड़ी से शुरू हुए इस आंदोलन के कारण इससे जुड़े लोगों के लिए 'नक्सली' शब्द प्रचलित हुआ।
बाद के वर्षों में इसी तरह की विचारधारा और सशस्त्र आंदोलन से जुड़े कई संगठन और गुट सामने आए। यही वजह है कि 'नक्सली' शब्द का इस्तेमाल आज भी व्यापक संदर्भ में किया जाता है।

माओवाद का नाम कहां से आया?
अब बात माओवाद की। माओवाद आधुनिक चीन के संस्थापक माओत्से तुंग की विचारधारा से जुड़ा है। यह विचारधारा हिंसक विद्रोह और हथियारबंद संघर्ष के जरिए सत्ता हासिल करने की बात करती है।
भारत में माओवाद की शुरुआत नक्सलवादी आंदोलन के दौरान ही हुई, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में फूट पड़ी और एक धड़ा माओवादी सोच की तरफ चला गया। यानी माओवाद नक्सलवाद से आगे बढ़ा एक उग्र और हथियारबंद आंदोलन है।

तो क्या नक्सली और माओवादी एक ही हैं?
यही सबसे बड़ा सवाल है। इसका जवाब सीधे 'हां' या 'नहीं' में देना सही नहीं होगा। माओवाद और नक्सलवाद से जुड़ा आंदोलन भले ही हिंसा से जुड़ा रहा है, लेकिन दोनों में एक सबसे बड़ा अंतर है। भले ही दोनों शब्द कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े हैं, लेकिन दोनों का स्वरूप अलग-अलग है। नक्सलवाद का जन्म नक्सलबाड़ी में हुआ।
वहीं, माओवाद का जन्म विदेशी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा है। कहा जाता है कि साल 1962 में चीन से युद्ध के बाद भारत में माओवादी विचारधारा को बढ़ावा मिला।

फिर 'उग्रवादी' किसे कहते हैं?
अब आते हैं तीसरे शब्द पर, जिसे लेकर भी लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। उग्रवादी किसी एक संगठन का नाम नहीं है। यह एक व्यापक शब्द है।
आम तौर पर किसी राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्य के लिए हिंसक या सशस्त्र रास्ता अपनाने वाले समूहों या लोगों के लिए संदर्भ के अनुसार 'उग्रवादी' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।

इसलिए किसी खबर में सिर्फ 'उग्रवादी' शब्द पढ़कर यह मान लेना सही नहीं होगा कि वह व्यक्ति या संगठन जरूरी तौर पर नक्सली या माओवादी ही है। इसके लिए खबर में बताए गए संगठन और घटना का संदर्भ देखना जरूरी होता है।
इसलिए अगली बार जब खबर में नक्सली, माओवादी या उग्रवादी शब्द पढ़ें, तो तीनों को एक ही अर्थ में न लें। इनके बीच संबंध जरूर है, लेकिन इतिहास, विचारधारा और संगठन के स्तर पर इनके इस्तेमाल का संदर्भ अलग-अलग है।
नक्सली शब्द भारत के नक्सलबाड़ी आंदोलन से निकली वामपंथी क्रांतिकारी धारा से जुड़ा है, माओवादी शब्द माओ त्से-तुंग की क्रांतिकारी विचारधारा से। हालांकि, ये दोनों ही विचारधाराएं, कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित है। जबकि उग्रवादी अलग-अलग राजनीतिक, धार्मिक, जातीय या क्षेत्रीय उद्देश्यों के लिए हिंसक तरीकों का सहारा लेने वाले समूहों के लिए इस्तेमाल होता है।
-डॉ. रत्नेश सिंह, सहायक प्रोफेसर, नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर।
नक्सली शब्द की पहचान 1967 के नक्सलबाड़ी आंदोलन से जुड़ी है, जबकि माओवाद माओत्से तुंग की विचारधारा से प्रभावित राजनीतिक धारा है। दोनों के बीच ऐतिहासिक और वैचारिक संबंध जरूर है, लेकिन इन्हें हर संदर्भ में समान मानना सही नहीं है।
-डॉ. हाकिम सिंह, राजनीति विज्ञान विभाग, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब।
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