जागरण संवाददाता, रांची : राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कहा कि देश की 12 करोड़ जनजातीय आबादी अपने विश्वास के आधार पर देवी-देवताओं की आराधना करते हैं। उसी को भारतीय संविधान में रीति-रिवाज, कस्टम या कस्टमरी लॉ के रूप में संरक्षित किया गया है जो कि आदिवासी संस्कृति की धरोहर है। परंतु देश के भोले भाले आदिवासियों पर चौतरफा हमला हो रहा है। केंद्रीय सरना समिति जैसे सामाजिक संगठनों की जिम्मेवारी काफी बढ़ गई है। सांसद और समाज का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते समाज पर आने वाले संकटों को सदन में पुरजोर तरीके से उठाएंगे। वे रविवार को हातमा बस्ती में आयोजित केंद्रीय सरना समिति की कार्यकारिणी पुनर्गठन-कार्यकर्ता सम्मेलन में बोल रहे थे।

कार्यक्रम में रांची के अलावा गुमला, लोहरदगा, लातेहार, रामगढ़, खूंटी, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा आदि जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

समिति के संरक्षक बिरसा पाहन ने कहा कि आदिवासियों की पहचान सरना मसना, अखड़ा, पाहन पईन भोरा एवं समाजिक रीति रिवाजों से है। परंतु झारखंड में दिनों दिन सरना आदिवासी समाज का शोषण, दमन हो रहा है। समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव ने कहा कि धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 का उल्लंघन हो रहा है। भाजपा नेत्री सह पार्षद रोशनी खलखो ने कहा कि पढ़े-लिखे जिम्मेवार लोगों को समाज को शिक्षित बनाने पर ध्यान देना होगा। सभा को आरती कुजूर, जगलाल पाहन, बिरसा पाहन, सुनील टोप्पो ने भी संबोधित किया। मौके पर मुख्य रूप से डॉ गुदरा उरांव, राम सहाय सिंह मुंडा, राम पाहन आदि उपस्थित थे।

बबलू मुंडा सर्वसम्मति से समिति के अध्यक्ष चुने गए : सभा के उपरांत केंद्रीय सरना समिति के कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया गया जिसमें सर्वसम्मति से बबलू मुंडा को अध्यक्ष चुना गया। शोभा कच्छप कार्यकारी अध्यक्ष, कृष्णकांत टोप्पो महासचिव, उपाध्यक्ष किरण तिर्की, अंजू टोप्पो, निर्मला मुंडा, सनील कच्छप, सचिव डब्लू मुंडा, अमर मुंडा, अरुण मुंडा, अजय, उपसचिव अमर मुंडा, गीता तिर्की, गायत्री उरांव, कोषाध्यक्ष जगरनाथ तिर्की बनाए गए।

Posted By: Jagran

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