रांची, (संजीव रंजन)। दक्षिण अफ्रीका से टेस्ट सीरीज हारने के एक दिन बाद विराट कोहली ने टेस्ट की कप्तानी छोड़ने का एलान कर दिया है। इससे झारखंड के खेल प्रेम‍ियों को थोड़ी न‍िराशा हुई है। व‍िराट कोहली पहले ही टी-20 और एकदिवसीय टीम की कप्तानी छोड़ चुके हैं। कोहली अब भारतीय टीम के किसी भी फार्मेट में कप्तान नहीं होंगे। विराट कोहली ने 68 टेस्ट मैचों में भारत की कमान संभाली, जिसमें 40 मुकाबले जीत कर देश का झंडा बुलंद रखा। विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने स्वदेश में 11 टेस्ट सीरीज खेलकर सभी शृंखला अपने नाम क‍िया है।

विराट कोहली ने लिखा इमोशनल मैसेज

कप्तानी छोड़ने का निर्णय लेने के बाद कोहली ने ट्विटर पर अपने भावुक संदेश में लिखा कि हर चीज को एक चरण पर रूकना पड़ता है और भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान के तौर पर अब यह मेरे लिए वह समय आ गया है जब मैं टेस्ट की कप्तानी को अलविदा कहूं। मैं जो कुछ भी करता हूं, हमेशा उसमें 120 प्रतिशत देने में विश्वास करता हूं। अगर मैं ऐसा नहीं कर सकता हूं तो मैं जानता हूं कि यह सही नहीं है। मेरे दिल में पूरी तरह स्पष्टता है और मैं अपनी टीम को धोखे में नहीं रख सकता।

महेंद्र स‍िंंह धौनी को शुक्रिया अदा किया

व‍िराट कोहली ने कहा कि उन्होंने सात साल कप्तानी की जो बहुत बड़ी बात है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे समझा और कप्तानी की जिम्मेवारी मुझे सौंपी वर्ष 2014 में आस्‍ट्रेल‍िया दौरे पर। मालूम हो क‍ि व‍िराट कोहला रांची के जेएससीए स्‍स्‍टेड‍ियम में वन डे, टेस्‍ट मैच और टी-20 मैच खेल चुके हैं। जब जब रांची में मैच हुआ, वह यहां खेलने जरूर आए। 19 नवंबर 2021 को न्‍यूजीलैंड के साथ खेले गए टी-20 मुकाबले में टीम इंड‍िया के साथ नहीं आए थे। झारखंड के खेल प्रेम‍ियों के भी वह दुलारे रहे हैं। यहां के खेल प्रेमी भी उन्‍हें बेहद पसंद करते हैं।

कठिन दौर में धौनी ने दिया साथ

आधुनिक समय के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक विराट कोहली का करियर एक समय खतरे में था, लेकिन तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने उन्हें बचा लिया। कोहली खराब दौर से गुजर रहे थे और चयनकर्ताओं द्वारा बाहर किए जाने के कगार पर थे, लेकिन धौनी के विश्वास ने उन्हें और उनके करियर को बचा लिया। 2012 के आस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान कोहली एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, जब चयनकर्ता उन्हें छोड़ना चाह रहे थे, लेकिन धौनी ने उनका समर्थन किया और उन्हें टीम से बाहर नहीं जाने दिया। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने खुलासा किया था कि अगर 2012 में चयनकर्ताओं की बात होती तो कोहली कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलते। कुछ पारियों के बाद कोहली आस्ट्रेलिया में खेले और कम स्कोर के साथ लौटे थे। चयनकर्ता उन्हें छोड़ना चाहते थे, क्योंकि पहले दो टेस्ट में उनका औसत सिर्फ 10.75 था। सहवाग उस टेस्ट सीरीज के दौरान टीम के उप कप्तान थे। सहवाग ने कहा था कि उन्होंने और धौनी दोनों ने मिलकर कोहली का समर्थन किया क्योंकि चयनकर्ता चाहते थे कि कोहली को बाहर किया जाए और इसके बजाय तीसरे टेस्ट में रोहित शर्मा को खेलाया जाए लेकिन दोनों ने कोहली पर विश्वास दिखाया। पर्थ टेस्ट मैच में कोहली को रिटेन करने के लिए वह और धौनी दोनों जिम्मेदार थे और बाकी इतिहास है। कोहली ने 44 और 75 के स्कोर के साथ वापसी की। उसके बाद कोहली का बल्ला किस तरह बोला यह बताने की आवश्यकता नहीं है।

पद छोड़ने के पीछे की कहानी...

व‍िराट कोहली की अचानक कप्तानी छोड़ने की घोषणा उनके और बीसीसीआइ के बीच चल रहे मनमुटाव से भी जोड़ा जा रहा है। यह मनमुटाव पिछले साल टी-20 विश्वकप से पहले उनके टी-20 कप्तानी इस्तीफे के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद बीसीसीआइ ने व‍िराट कोहली को वनडे कप्तानी से हटा दिया था। रोहित शर्मा को नया कप्तान बनाया था। एक दिन बाद बीसीसीआइ अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा था कि उन्होंने व‍िराट कोहली को टी-20 कप्तान के रूप में पद छोड़ने के लिए नहीं कहा था, लेकिन व‍िराट कोहली ने जवाब में कहा कि उनसे इस संदर्भ में बोर्ड के किसी भी अधिकारी से बात नहीं हुई। कोहली ने अपनी निराशा भी व्यक्त की और कहा कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट टीम चुनने के लिए चयन बैठक से डेढ़ घंटे पहले एकदिवसीय कप्तान के रूप में हटाए जाने के बारे में बताया गया था। यह विवाद तब और बढ़ गया जब मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने 31 दिसंबर को दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए एकदिवसीय टीम की घोषणा करते हुए कहा कि बोर्ड के अधिकारियों ने कोहली से टी-20 की कप्तानी नहीं छोड़ने को कहा था, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे। विराट कोहली की कप्तानी ने भारत ने 68 टेस्ट खेले जिसमें 40 में जीत मिली। 17 टेस्ट हारे व नौ टेस्ट ड्रा रहा।

Edited By: M Ekhlaque