लातेहार, [उत्कर्ष पाण्डेय]। लातेहार जिले के नक्सल प्रभावित बरवाडीह प्रखंड के सुदूर इलाके में पहले जहां बारुद की गंध आती थी, वहां के ग्रामीण कोरोना को लेकर जागरूक हैं। गांवों में निवास करने वाले ग्रामीणों में अधिकांश ने कोरोना की जांच करा ली है और टीका भी ले लिया है। कुछ ग्रामीण संक्रमित हुए तो सकारात्मक सोच और कोविड नियमों का पालन कर स्वस्थ होकर वापस अपने काम में जुट गए। नतीजा इन गांवों में आज हरी-हरी सब्जियां लहलहा रही हैं। हिंसा और रोजगार की समस्या के कारण जो ग्रामीण पलायन कर जाते थे, वे अब सब्जियां उगाकर मुनाफा कमा रहे हैं। यह संभव हो सका है भारतीय लोक कल्याण संस्थान की ओर से जेटीडीएस प्रोजेक्ट के तहत 23 गांवों की 228 एकड़ भूमि पर तीन हजार किसानों से सब्जियों की फसल लगवाने के कारण।

ग्रामीणों ने कहा- टीका व जांच से नहीं फैला कोरोना, खेती से दूर हो रही गरीबी

अमरेंद्र, रघुनाथ, जगेश्वर, मुन्ना, रामप्रसाद आदि ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास जमीन है, लेकिन उसमें खेती नहीं हो पा रही थी। पैसे की तंगी के कारण घर के पुरुष दूसरे राज्यों में कमाने जाने लगे थे। खेती कैसे की जाए, इसकी जानकारी नहीं थी। लेकिन बीते जनवरी माह में लाेक कल्याण संस्थान वालों ने हमलोगों को अच्छे बीज और कृषि पद्धति की जानकारी दी। इससे सब्जियों की पैदावार बढ़िया हुई और अब यही हमारा रोजगार बन गया है। मार्च माह में कोरोना के लहर की शुरुआत हुई तो हमलोगों ने कोरोना की जांच और टीका लेने में उत्साह के साथ भाग लिया। इसी का परिणाम है कि हमलोगों के गांव में कोरोना का फैलाव नहीं हुआ।

23 गांवों में 228 एकड़ भूमि पर लहलहा रही सब्जी की खेती

नक्सल प्रभावित लुहूर, लेंदगाई, अमडीहा, कल्याणपुर, बारीचट्टान, कुचिला, हरीनामार, चंगुरू, ओपाग व होसिर जैसे 23 गांवों में तीन हजार किसान करैला, लौकी, नेनुआ व खीरा की खेती कर रहे हैं। फरवरी माह में लगी खेती से अब किसानों को मुनाफा होना शुरू हो गया है। संस्थान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रथम चरण में सब्जियों की बिक्री कर किसानों को छह लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा खेतों से रोजाना फसल निकाल कर बिक्री के लिए जा रही है।

किसानों के साथ 60 लोगों की मॉनिटरिंग टीम सक्रिय

संस्थान की ओर से जनवरी में ही 228 एकड़ भूमि में किसानों को सब्जियों की खेती के लिए प्रेरित किया गया। योजना के तहत किसानों के खेत की जांचकर उन्हें बताया गया कि वे कौन सी फसल उगा सकते हैं। फिर वैज्ञानिकों की देखरेख में फरवरी माह में खेती लगवा दी गई। साथ ही तीन हजार किसानों की खेती की मॉनिटरिंग के लिए 60 लोगों की टीम सक्रिय हो गई। एक किसान ने 10 डिसमिल जमीन पर खेती की। सभी को सही मार्गदर्शन देकर उन्नत खेती कराई गई। इसका बड़ा असर यह हुआ है कि एक तरफ जहां ग्रामीणों की आय में वृद्धि हुई, वहीं उनके भोजन स्तर और स्वास्थ्य में भी सुधार शुरू हो गया।

'ग्रामीणों में जागरूकता की कमी है। इस कारण जमीन होने के बावजूद लाभ नहीं कमा पा रहे थे। ग्रामीणों की माली हालत सुधारने के लिए संस्थान उन्हें बेहतर तरीके से सब्जियां उगाने का प्रशिक्षण दे रहा है। किसान परिवारों को ट्रेनिंग के साथ ही बेहतर बीज और जैविक खाद उपलब्ध कराई जा रही है। इससे अब तक 23 गांवों के तीन हजार किसान लाभान्वित हुए हैं।' -संदीप वैद्य, परियोजना समन्वयक, भारतीय लोक कल्याण संस्थान।

'सुदूर गांवों में निवास करने वाले ग्रामीणों ने वाकई अच्छा कार्य किया है। कोरोना थमने के बाद मैं इन गांवों में जरूर जाकर ऐसे उत्साही किसानों से मिलूंगा।' -सुनील सिंह, सांसद, चतरा लोकसभा क्षेत्र।

Edited By: Sujeet Kumar Suman