रांची, राज्य ब्यूरो। हजारीबाग के बरही स्थित राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल बरही में प्रयोगशाला सेवक रहे फुलेश्वर झा की ड्यूटी के दौरान मौत के दस बाद भी जब पत्नी भगवान देवी को मुआवजा नहीं मिला, तो उसने थक-हारकर लोकायुक्त कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। 17 अप्रैल 2018 को लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय से अधिकारियों की शिकायत की। बताया कि फिटमेंट कमेटी की अनुशंसा के बावजूद उसे अब तक 10 लाख रुपये नहीं मिले।

लोकायुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग से ब्योरा मांगा तो आनन-फानन में पीडि़ता को दस लाख रुपये का मुआवजा मिल गया। झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग ने लोकायुक्त को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि योजना सह वित्त विभाग ने 21 अगस्त 2019 को स्व. फुलेश्वर झा की पत्नी भगवान देवी को एकमुश्त क्षतिपूर्ति अनुग्रह अनुदान की भुगतान राशि दस लाख रुपये का आवंटन उपलब्ध करा दिया। इसके बाद हजारीबाग के राष्ट्रीय पथ प्रमंडल हजारीबाग ने स्व. फुलेश्वर झा की पत्नी भगवान देवी को दस लाख रुपये का भुगतान कर दिया।

17 अप्रैल 2018 को लोकायुक्त कार्यालय में की गई थी शिकायत

हजारीबाग के बरही प्रखंड परिसर निवासी स्व. फुलेश्वर झा की पत्नी भगवान देवी ने 17 अप्रैल 2018 को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत पत्र में बताया था कि उनके पति फुलेश्वर झा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल बरही में प्रयोगशाला सेवक के पद पर कार्यरत थे। 14 दिसंबर 2008 को हजारीबाग स्थित प्लांट में मिश्रित मॉल के गुणवत्ता की जांच के क्रम में डंपर पर चढ़ रहे थे कि उसी क्रम में डंपर के चालक ने अचानक लापरवाही से गाड़ी बढ़ा दी, जिससे उनकी पैर फिसल गई।

वे गिरकर जख्मी हो गए। हजारीबाग स्थित सदर अस्पताल ले जाने के क्रम में उनकी मौत हो गई। इसके बाद वित्त विभाग ने 28 फरवरी 2009 को फिटमेंट कमेटी की अनुशंसा के आलोक में सरकारी कर्मी की कार्य के दौरान मृत्यु होने पर दस लाख रुपये अनुदान भुगतान का आदेश है। करीब दस साल से वह अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटती रही, लेकिन उसे अनुग्रह अनुदान के रूप में दस लाख रुपये नहीं मिले।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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