रांची, जासं। विश्व हिंदू परिषद का उद्देश्य जाति, धर्म, संप्रदाय के भेद से मुक्त होकर समाज को समरस बनाना है। यह बातें केंद्रीय विहिप के सहमंत्री एवं केंद्रीय धर्मप्रसार प्रमुख अच्युतानंद कर ने शुक्रवार को रांची में विहिप कार्यालय सभागार में धर्मप्रसार आयाम के तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन करते हुए कहा।

उन्होंने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि परिषद का प्रथम उद्देश्य संतों द्वारा उद्घोषित राष्ट्रीयता का बोध, संस्कार व जीवन वृत्ति के निरूपण ही मानक स्वीकार करना है। दूसरा उद्देश्य जाति, धर्म, संप्रदाय के भेद से मुक्तहोकर समाज को समरस बनाना है। तीसरा उद्देश्य विश्व के समस्त ¨हदू मान बिंदुओं व हिंदुओं कीसनातन संस्कृति की सुरक्षा तथा संस्कार की ज्योति को निरंतर जलाये रखना तथा चौथा उद्देश्य कथित मुस्लिमों एवं ईसाइयों द्वारा धर्मातरित हिंदुओं को पुन: घर वापसी कराना है।

इस अवसर पर विहिप के क्षेत्रीय मंत्री वीरेंद्र विमल, प्रात मंत्री डा वीरेंद्र साहू, प्रात उपाध्यक्ष देवी प्रसाद शुक्ला, धर्मप्रसार प्रात प्रमुख गणेश विद्यार्थी, धर्मप्रसार प्रात कार्याध्यक्ष वीकेसिंह, विजय विनोचा, कोषाध्यक्ष कमल अग्रवाल, संरक्षक सौम्या मिश्रा, प्रात नारी शक्तिप्रमुख रेणु अग्रवाल, धर्मप्रसार प्रांत सहमंत्री नंद किशोर प्रसाद, रानी सिन्हा, हीरा देवी, धनेश्वर महतो आदि उपस्थित थे।

गुलामी के बाद भी ¨हदू समाज ने सनातन परंपरा को जीवित रखा : अच्युतानंद कर ने कहा, सात सौ वर्ष तक मुस्लिमों के अधीन रहने के बावजूद भी ¨हदू समाज निरंतर संघर्ष करते हुए अपनी सनातन परंपरा को जीवित रखा। संघर्ष के कारण ही सनातनी परंपरा के लोगों को जंगल में वास करना पड़ा, जो वनवासी कहे जाने लगे। ¨हदू का जीवन स्वाभिमानपूर्वक रहा है।

¨हदू भले ही छोटे से छोटे कार्य करते रहे परंतु अपनी धर्म-संस्कृति को जीवित रखने के लिए सदैव अडिग रहे। उन्होंने कहा हमसे बिछड़े हुए आज के तथाकथित मुस्लिम अथवा ईसाई को पुन: घर वापसी करना चाहिए। अपने सनातन परंपरा में पुन: उनकी घर वापसी हो ऐसा प्रयत्‍‌न करना चाहिए।

Posted By: Jagran