रांची, (संजय कुमार) । विश्व हिंदू परिषद ने केंद्रीय प्रन्यासी मंडल एवं प्रबंध समिति की संयुक्त बैठक में प्रस्ताव पारित कर मतांतरित जनजाति वर्ग को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने के लिए केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन की मांग की है। गुजरात के जूनागढ़ में चल रहे तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन शनिवार को संबंधित प्रस्ताव दक्षिण गुजरात के डा. गिरीश भाई नलवाया ने रखा और छत्तीसगढ़ के बंशीधर उरांव ने अनुमोदन किया।

अपनी आवश्यकता और पंरपरा के अनुसार रहते हैं हिंदू

संबंधित प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत में हिंदू समाज हमेशा से अपनी सुविधा, आवश्यकता व परंपरा के अनुसार नगरों, ग्रामों, वनों, पहाड़ों में रहते रहे हैं। जनजातियों के संबंध में भारतीय संविधान में स्पष्ट है कि ईसाई अथवा मुस्लिम बनने के बाद अनुसूचित जातियों को दिए गए आरक्षण एवं अन्य लाभ वे प्राप्त नहीं कर सकेंगे। यह एक प्रकार का संवैधानिक संरक्षण है। दुर्भाग्य से यह संरक्षण जनजातियों को अभी तक प्राप्त नहीं हो सका है। इसके कारण मतांतरित ईसाई एवं मुस्लिम मूल अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक दोनों प्रावधानों का लाभ उठा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने केरल सरकार बनाम मोहनन के मामले में निर्णय देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि जनजाति का कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म त्याग कर दूसरा धर्म अपना लेता है और अपनी रूढ़ीवादी परंपरा, रीति-रिवाज, पूजा पद्धति एवं संस्कार को छोड़ देता है, वह जनजाति नहीं माना जाएगा। इसलिए केंद्र सरकार जल्द इस पर निर्णय ले।

धर्मांतरण करने वालों को जनजाति समाज का हिस्सा

प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि जनजाति के जो लोग धर्मांतरण करते हैं वे अपनी देवी-देवताओं, पूजा पद्धति, परंपरा, श्रद्धाओं व संस्कृति का परित्याग कर देते हैं । उन्हें जनजाति समाज का भाग नहीं माना जा सकता है। ईसाइयों एवं मुसलमानों के बढ़ते हुए षड्यंत्र और उनकी व्यापकता को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद केंद्र सरकार से मांग करती है कि संविधान में आवश्यक संशोधन करके मतांतरित जनजातीय समाज को जनजातियों की सूची से बाहर करें, जिससे मूल जनजातिओं को अपने अधिकार मिल सके। प्रस्ताव में कहा गया है कि 18 प्रतिशत मतांतरित जनजाति ही जनजाति समाज को मिल रहे आरक्षण का 70 प्रतिशत लाभ उठा रहे हैं। जबकि 30 प्रतिशत आरक्षण का लाभ ही सही में जो जनजाति समाज के लोग हैं उनको मिल रहा है। मतांतरित जनजाति दोहरा लाभ ले रहे हैं। इसलिए संविधान संशोधन कर वैसे लोगों को दोहरा लाभ से वंचित किया जाए। पूर्व में लोकसभा सदस्य बाबा कार्तिक उरांव ने भी संविधान में संशोधन की मांग की थी जो आज तक नहीं हुआ।

पोप भारत यात्रा से पूर्व अपनी स्थिति स्पष्ट करें

पोप के भारत आगमन पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने बैठक में कहा कि भारत आगमन के पूर्व पोप फ्रांसिस अपनी स्थिति को स्पष्ट करें कि

▪क्या पूर्व के पोप के द्वारा घोषित तीसरी सहस्राब्दी में एशिया के विशाल धरती पर मतांतरिक करने की घोषणा को वापस लेंगे?

▪ कैथोलिक चर्च ने पूरी दुनिया में मतांतरण के लिए अभूतपूर्व अत्याचार किए हैं जिनके लिए उसके पूर्ववर्तियों ने क्षमा याचना भी की है। क्या भारत में भी मतांतरण एवं अत्याचार पर क्षमा याचना करेंगे?

▪भारत में मतांतरण के लिए ईसाई मिशनरियों ने कई प्रकार की धोखाधड़ी एवं षड्यंत्र करते रहते हैं। क्या यह बंद होगी?

▪ भारत में ईसाइयों द्वारा हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक व हिंदू धर्म के प्रति घृणा फैलाने वाले साहित्य छापा गया है। क्या इन साहित्यों को वापस लेने तथा भविष्य में भ्रम की स्थिति प्रचारित नहीं करने का आदेश देंगे?

एक पेड़ को काटना एक संत की हत्या करने के समान

बैठक में पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण संरक्षण संयोजक गोपाल आर्य ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी धरातल सुरक्षित रहेगा। एक वृक्ष का काटना एक संत की हत्या करने के समान है। सृष्टि को बचाने के लिए पर्यावरण को बचाना आवश्यक है। भूमी को पलास्टिक मुक्त करना होगा क्योंकि यह धरातल के लिए जहर है। पर्यावरण को धर्म, संस्कृति, परंपरा का अंग बनावें। पर्यावरण सर्वव्यापी, सर्वस्पृषी व सर्वमान्य है।

Edited By: Madhukar Kumar