रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड में शानदार प्रदर्शन करने वाले एनडीए गठबंधन को केंद्र में बनने वाली सरकार में भागीदारी मिलनी तय है। लेकिन मंत्री कौन बनेगा और कितने इसे लेकर सस्पेंस कायम है। मंत्री पद को लेकर रांची से दिल्ली तक लाबिंग का दौर तेज है। पिछले लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने राज्य में 14 में से 12 सीटों पर जीत हासिल की थी और राज्य के कोटे में दो राज्यमंत्री के पद आए थे।

पिछली सरकार में जयंत सिन्हा और सुदर्शन भगत को राज्यमंत्री बनाया गया था। इस बार भी झारखंड का मंत्री पद का कोटा कुछ ऐसा ही रह सकता है। एक मंत्री सामान्य सीट से तो दूसरा मंत्री जनजातीय हो सकता है। सुदर्शन और जयंत दोनों ही मंत्री पद की रेस में इस बार भी बने हुए हैं। इसके अलावा शिबू सोरेन को हराने वाले युवा नेता सुनील सोरेन की धमक दिल्ली तक पहुंच गई है।

जाहिर है उनके नाम को नकारा नहीं जा सकता। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुंडा भाजपा का बड़ा चेहरा हैं और अनुभवी भी हैं। निशिकांत दुबे, पीएन सिंह जैसे बड़े नेता भी मंत्री पद की रेस में बताए जा रहे हैं।

यदि झारखंड का कोटा दो से बढ़कर तीन होता है तो एनडीए कोटे से आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। वैसे भी भाजपा अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है, इस लिहाज से आजसू का दावा मजबूत होता दिखाई दे रहा है। मंत्री पद की रेस में अन्नपूर्णा देवी अकेली महिला होने के कारण शामिल हैं।

विधानसभा चुनाव भी बनेगा मंत्री के चयन का आधार

झारखंड में छह माह के भीतर विधानसभा के चुनाव हैं। जाहिर है मंत्रियों का चयन चुनाव को ध्यान में रखकर किया जाएगा। क्षेत्रीय और जातीय समीकरण भी साधे जाएंगे। इस लिहाज से संताल परगना प्रमंडल से एक मंत्री बनना तय है। कोल्हान की उपेक्षा हो सकती।

वैसे भी इस क्षेत्र से मुख्यमंत्री रघुवर दास और मंत्री सरयू राय स्वयं आते हैं। ऐसे में यहां अतिरिक्त मंत्री पद देने का कोई औचित्य नहीं है। उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर में से किसी एक का प्रतिनिधित्व होगा, यह तय है। संभव यह भी है कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए सामान्य और जनजातीय कोटे के अलावा ओबीसी कोटे से भी राज्य में एक मंत्री बनाया जाए।

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Posted By: Sujeet Kumar Suman