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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हेमंत और बसंत के लिए आज अहम दिन, झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई, खनन लीज व शेल कंपनी का मामला

By M EkhlaqueEdited By:
Published: Fri, 29 Jul 2022 08:40 AM (IST)

Hemant Soren News झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई विधायक बसंत सोरेन से संबंधित ...और पढ़ें

Jharkhand Latest News: सीएम हेमंत और विधायक बसंत मामले की आज हाई कोर्ट में सुनवाई।
Jharkhand Latest News: सीएम हेमंत और विधायक बसंत मामले की आज हाई कोर्ट में सुनवाई।

राज्य ब्यूरो, रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लीज आवंटित करने व उनके भाई बसंत सोरेन के करीबियों द्वारा शेल कंपनी चलाने के मामले पर झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। यह मामला चीफ जस्टिस डा. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने झामुमो विधायक बसंत सोरेन और रवि केजरीवाल को प्रतिवादी बनाने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके अलावा अन्य प्रतिवादियों के नाम हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने ईडी को मनरेगा घोटाले में दाखिल (अभियोजन शिकायत) आरोपपत्र भी कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था।

अवैध कमाई कर निवेश करने का आरोप

बता दें कि इस संबंध में प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन के करीबियों की ओर से शेल कंपनी बनाई गई। इसमें अवैध कमाई को निवेश कर अन्य जगहों पर संपत्ति खरीदी गई है। इसके अलावा हेमंत सोरेन के खनन मंत्री रहते हुए माइनिंग लीज आवंटित किया गया, जो कि आफिस आफ प्राफिट के दायरे में आता है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चार अगस्त को

इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार की एसएलपी पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। इस मामले की सुनवाई अब चार अगस्त को होगी। इस मामले में ईडी का पक्ष रख रहे वरीय अधिवक्ता तुषार मेहता की तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से समय देने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए चार अगस्त की तिथि निर्धारित की। हेमंत सोरेन और सरकार की ओर से हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट ने नियमों का पालन किए बिना दाखिल जनहित याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इसलिए हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त किया जाए।