रांची, जासं। कोरोना महामारी में रांची में बड़ी संख्या में युवाओं ने लोगों की मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया है। खाने-पीने से लेकर रोजगार तक देने की कोशिश की। इन युवाओं ने सच्चे रूप में समाज का प्रतिनिधित्व किया है। रांची और रामगढ़ के बीच कई ऐसे गांव है जहां आज भी गरीबी काफी ज्यादा है। लोगों का मुख्य पेशा खेती या मजदूरी है। इन सबके बीच इन 4 युवाओं ने न उनकी सिर्फ मदद की, बल्कि उन्‍हें आत्‍मनिर्भर भी बनाया।

सुदूर इलाकों में मदद के साथ दिया रोजगार

पेशे से कंपनी सेक्रेट्री सरिता पांडेय ने अपने पिता बरून कुमार पांडेय के साथ मिलकर 9 गांवों की मदद का फैसला किया। उन्होंने इन गांव के लोगों के लिए पहले खाने-पीने की व्यवस्था की। इसके बाद वहां की महिलाओं को स्वरोजगार की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। उनकी टीम ने 12000 स्वयं निर्मित मास्क, 1034 थैला, 2500 किलो चावल और 600 किलो दाल का वितरण इन गांवों में किया है। इस वितरण में तैयार मास्क और थैला स्वरोजगार की ट्रेनिंग लेने वाली महिलाओं के द्वारा बनाया गया।

मनुष्यों के साथ पशु-पक्षियों के भी खाने की व्यवस्था की

अमित कुमार शर्मा रांची के माड़वाड़ी युवा मंच से जुड़े हुए हैं। मंच की मदद से उन्होंने लॉकडाउन के सभी फेज में और अनलॉक में भी रांची के विभिन्न स्थानों में और रांची के बाहर सुदूर ग्रामीण इलाकों में, जहां सरकारी मदद भी नहीं पहुंच रही थी, वहां जाकर लोगों की मदद की।

जगह-जगह सुखा और बना हुआ भोजन आदि का वितरण किया। इसके साथ ही लोगों के बीच कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया गया। उन्होंने मंच के अन्य युवा सहयोगियों की मदद से शहर के विभिन्न हिस्सों में पशुओं के लिए चारा और पक्षियों के लिए दाना की भी व्यवस्था की।

आदिवासी गांवों तक पहुंचाई मदद

विकास तिर्की काफी लंबे समय से आदिवासी लोगों के बीच सेवा कार्य कर रहे हैं। लॉकडाउन में कई ऐसे गांव थे, जहां लोगों के सामने खाने-पीने की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गयी थी। इसे देखते हुए विकास तिर्की ने उनकी मदद का जिम्मा उठाया। उन्होंने पूरे लॉकडाउन में एक हजार से ज्यादा परिवारों तक लगातार राशन और जरूरत का सामान पहुंचाया।

विकास बताते है कि इस काम में शुरू में काफी दिक्कत हुई। मगर धीरे-धीरे करके लोग खुद मदद के लिए आने लगे। कई लोगों का साथ मिला। उनके टीम झारखंड क्रिस्चियन युथ एसोसिएशन ने सुबह से लेकर देर शाम तक आदिवासी इलाकों में लोगों की मदद के लिए काम किया।

शहर में दिहाड़ी मजदूरों की उठाई जिम्मेदारी

अनिल कुमार यादव एक ल्यूब्रिकेंट कंपनी के मालिक हैं। मगर लॉकडाउन में वो खुद लोगों की मदद के लिए सड़क पर उतर गये। उन्होंने शहर में दिहाड़ी मजदूर का काम करने वाले करीब 500 के आसपास परिवारों का जिम्मा लिया। जब तक निर्माण कार्य को शुरू करने का आदेश नहीं दिया गया, तब तक लगातार उनके खाने-पीने के सूखे राशन की व्यवस्था की।

इसके साथ ही रिम्स के पास हर दिन दो वक्त लोगों के खाने की व्यवस्था की। उन्होंने शहर में सड़क किनारे घूम रहे मानसिक रूप से अक्षम लोगों को भी खोज-खोजकर खाना खिलाया। इसके साथ ही कई कॉलोनियों में सैनिटाइजेशन का काम भी करवाया।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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