जागरण संवाददाता, रांची : त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा चलाई जा रही मेगा सेल से स्थानीय वितरकों का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसे लेकर रविवार को झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (जेसीपीडीए) ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। जेसीपीडीए के सचिव संजय अखौरी ने व्यक्त की है कि भारी छूट की आड़ में प्रीडेटरी प्राइजिग यानी वह मूल्य जिस पर ग्राहक को आकर्षित किया जा सके, भले ही वह लागत से भी कम हो क्रेडिट-डेबिट कार्ड बैंकों द्वारा कैशबैक, और खरीदारों के लिए ईएमआइ पर ब्याज की उच्च दर की गहनता से जांच जरूरी है। उन्होंने पत्र में कहा है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या ई-कॉमर्स के विक्रेताओं द्वारा एकत्र किए जा रहे जीएसटी को सरकार के मानदंडों के अनुसार जमा किया जा रहा है या नहीं। ई कॉमर्स पोर्टल ने करीब 6.5 लाख नये विक्रेताओं को जोड़ा है। ई-कॉमर्स द्वारा क्या भारी भरकम ब्याज रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार लिया जा रहा है या नहीं।

संजय अखौरी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान नजदीक के दुकानों ने ही देश की जनता को सभी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई। अब त्योहारी सीजन में ई कॉमर्स कंपनियों द्वारा लोक लुभावन छूट की वजह से ग्राहकों ने ई कॉमर्स प्लेटफार्म की ओर रुख कर लिया है। कोविड के कारण व्यापार की सेहत कब तक सुधरेगी इसका आकलन करना मुश्किल है क्योंकि लोगों में अभी डर बना हुआ है। ऐसे में ई कॉमर्स कंपनियों के कारण खुदरा व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दैनिक उपभोग की चीजें भी ई कॉमर्स कंपनियां लोगों के घरों में पहुंचा रही हैं। इससे राज्य में खुदरा व्यापार 40 से 50 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। छोटे-छोटे दुकानदार की स्थिति तो और भी खराब है। अगर दिवाली पर भी यही हाल रहा तो खुदरा विक्रेता पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे।

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