राज्य ब्यूरो, रांची : आदर्श आचार संहिता की सख्ती के बाद रांची लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में भोंपू का शोर थम गया है। पार्टियों की हलचल और रणनीतिकारों का सारा फोकस अब बूथ मैनेजमेंट पर है। भाजपा जहां 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' का नारा दे बूथ मैनेजमेंट में जुटी है, वहीं कांग्रेस समेत अन्य दल भी अपने-अपने तरीके से इसे मैनेज करने की जुगत में हैं। बूथ मैनेजमेंट में बहुत कुछ मैनेज करना पड़ेगा, दलों को इस बात का पूरा भान है। लिहाजा उसकी भी तैयारी अंतिम दौर में तेज हो गई है।

विधानसभावार चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप से दे रही भाजपा ने बूथ मैनेजमेंट की जवाबदेही भी विधायकों के हवाले कर दी है। भाजपा ने बूथों को चार श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में सुनिश्चित जीत, दूसरी में अच्छा प्रदर्शन, तीसरी में कमजोर और चौथी श्रेणी में वोटों के मामले में पिछले चुनाव में लगभग नगण्य प्रदर्शन वाले बूथों को शामिल किया गया है। तीसरी और चौथी श्रेणी के बूथों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

कांग्रेस ने इसी तरह अपने आधार क्षेत्रों की अपेक्षा कमजोर बूथों पर अपने समर्थकों को तैनात रखा है। ऐसा करने के पीछे उसकी कोशिश भाजपा के आधार क्षेत्रों में सेंधमारी कर खुद के वोट बैंक को मजबूत बनाने की है। बहरहाल चुनाव प्रचार के अंतिम दिन शनिवार को प्रत्याशियों ने अपनी अंतिम ताकत झोंक दी। अहल सुबह से लेकर देर रात तक मतदाताओं को लुभाने की कोशिश हुई। अब रविवार को डोर टू डोर घूमकर प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने का काम करेंगे।

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