रांची, [अमन मिश्रा]। Lalu Prasad Yadav Latest News, Lalu Yadav News रिम्स के पेइंग वार्ड के बाहर शनिवार को दिन भर मेले सा नजारा रहा। झारखंड और बिहार के छोटे स्तर से लेकर बड़े कद्दावर नेता-कार्यकर्ता एक-एक कर जमा हो रहे थे। दोपहर 12 बजे के बाद रिम्स परिसर में दर्जनों बिहार नंबर की गाडिय़ां और सैैंकड़ों  की संख्या में लोग दिख रहे थे। इसी भीड़ के बीच शाम 5:13 बजे लालू प्रसाद को पेइंग वार्ड के कमरा नंबर ए11 से निकाला गया। 5:15 बजे बेटी मीसा ने पिता के हाथ पकड़ उन्हें सहारा देते हुए रिम्स के कार्डियक एंबुलेंस में बिठाया। जैसे ही राजद सुप्रीमो एंबुलेंस में बैठे, शेर-ए-बिहार जिंदाबाद के नारे लगने शुरू हो गए। देर तक समर्थक नारे लगाते रहे। 

राबड़ी को रातभर लालू की चिंता में नही आई नींद, सुबह होते ही पहुंचीं रिम्स

शुक्रवार देर रात 12:42 बजे रिम्स में इलाजरत पति से मुलाकात कर निकलने के बाद शनिवार को भी 10:32 बजे बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पेइंग वार्ड पहुंच गईं। सूत्रों ने बताया कि पति के स्वास्थ्य की ङ्क्षचता के बीच राबड़ी देवी को पूरी रात नींद नहीं आई। वह अपने दोनों बेटों और बेटी-दामाद के साथ होटल रेडिशन ब्लू में ठहरी थीं। सुबह उठने के बाद नाश्ता भी नहीं किया। रिम्स आने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने साथ नाश्ता किया। रिम्स कैंटीन से ही उनके लिए सूप बनाकर भेजा गया था, जो चिकित्सकों की सलाह से ही उन्हें दिया जा रहा था। इधर, नाश्ता के थोड़ी देर बाद ही मेडिकल बोर्ड की टीम उनके हेल्थ का रिव्यू करने भी पहुंची थी। 

एक बजे मीसा भारती भी पहुंचीं, पिता के साथ ही निकलीं बाहर

मां राबड़ी देवी के बाद दोपहर करीब एक बजे लालू प्रसाद की बड़ी बेटी मीसा भारती भी पेइंग वार्ड पहुंचीं। बेटी अंदर जाने से पहले पिता के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित दिख रही थीं। मीडिया ने मीसा से लालू के स्वास्थ्य संबंधित जानकारी लेनी चाही, लेकिन वह बगैर कुछ कहे अंदर चली गईं और पिता के साथ ही बाहर निकलीं। मीसा के बाद 3:19 बजे तेजस्वी भी रिम्स पहुंचे। यहां आने से पहले वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने पहुंचे थे। वहां से होटल में एक घंटे रुकने के बाद पिता के पास पहुंचे। तेजस्वी के साथ झारखंड सरकार के दो मंत्री भी मौजूद रहे। कृषि मंत्री बादल पत्रलेख व श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता पेइंग वार्ड के बाहर ही दो घंटे से अधिक देर तक रुके। मंत्रियों के साथ राजद के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह, पूर्व मंत्री सुरेश पासवान, विधायक भोला यादव, शक्ति यादव सहित कई कार्यकर्ता व नेता मौके पर मौजूद रहे।

चार बार हुई मेडिकल जांच, एक बार फिर बिगड़ी थी तबीयत

एम्स दिल्ली जाने से पहले लालू प्रसाद की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई थी। शनिवार सुबह 8:30 बजे उन्हें फिर सांस लेने में परेशानी हुई थी। हालांकि तब डा. उमेश प्रसाद की टीम के चिकित्सक पेइंग वार्ड में ही मौजूद थे, जिन्होंने तुरंत उपचार कर उन्हें स्टेबल किया। चिकित्सकों के अनुसार सुबह 8 बजे से शाम पांच बजे तक चार बार उनकी मेडिकल जांच हुई। डा. उमेश प्रसाद व डा. डीके झा बारी-बारी से पेइंग वार्ड में आते-जाते दिखे।

रिम्स के कार्डियोलाजी विभाग में 4 अगस्त 2018 को किए गए थे भर्ती

चारा घोटाले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद रिम्स परिसर में इलाज कराते हुए ढाई साल से रह रहे थे। 29 माह बाद शनिवार को वह रिम्स परिसर से बाहर निकले। ढाई साल में रिम्स में रहते हुए अक्सर अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहे। जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाने से लेकर उन पर कई तरह के आरोप लगे। उन्होंने यहीं से बिहार चुनाव की कमान भी संभाले रखी। जेल में रहकर लालू द्वारा बिहार के विधायक को फोन कर विधानसभा अध्यक्ष चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश का आडियो भी वायरल हुआ।

चार अगस्त 2018 को इन्हें बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से बलतोड़ व शुगर बढऩे की शिकायत के बाद रिम्स में भर्ती किया गया था। कार्डियोलाजी विंग में उनका इलाज चल रहा था। यहां एक माह रहने के बाद कुत्तों के भौंकने से परेशान लालू प्रसाद के नाम से 6 सितंबर 2018 को पेइंग वार्ड में कमरा नंबर ए11 अलॉट किया गया। तब से पूरे दो साल वे इसी वार्ड के कमरे मेें रहे। इस बीच दो बार डेंटल कालेज दांत दिखाने व एक बार सुपरस्पेशियलिटी विंग में अल्ट्रासांउड के लिए लाए गए थे। 

चार माह रिम्स निदेशक के बंगले में भी रहे

उच्च श्रेणी के कैदी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को कोरोना के संक्रमण से बचाने के उद्देश्य से पेइंग वार्ड के जिस तल पर रखा गया वहां एक फ्लोर के सभी 15 कमरे उन्हें सुरक्षित रखने के लिए खाली रखे गए। इसपर सवाल उठा तो 4 अगस्त 2020 को उन्हें रिम्स निदेशक के केली बंगले में शिफ्ट किया कर दिया गया। यहां इन्हें नौकर-चाकर की भी सुविधा दी गई थी। ये इकलौते ऐसे मरीज हैैं जिन्होंने रिम्स को हर दिन के हिसाब से 1000 रुपये भुगतान किए हैं। यह रकम 2 साल 2 माह में 7.6 लाख हुई, जिसका भुगतान रिम्स को किया गया। 

रिम्स में क्या-क्या हुआ सेहत मेें बदलाव

रिम्स में भर्ती करने के बाद इन्हें कई तरह की परेशानियां हुईं। किडनी की समस्या तो पहले से थी ही, लेकिन पूर्व में यह 35 फीसद से अधिक फंक्शनिंग थी जो घटकर 25 फीसद हो गई। डायलसिस की भी नौबत आने वाली थी। इससे पहले अक्सर ब्लड प्रेशर व शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव देखा जाता था। इसके अलावा मूत्र मार्ग में संक्रमण, पेरीआर्थराइटिस (जोड़ों के दर्द), क्रिटनिन लेवल बढऩे, सांस लेने में परेशानी, बलतोड़ और चेहरे में सूजन समेत कई बीमारियों से वह रिम्स में रहते हुए जूझे।

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