लोहरदगा, [राकेश कुमार सिन्हा]। नई दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में 14-22 मार्च को आयोजित धार्मिक सम्मेलने के बाद पूरे देश में कोरोना संक्रमितों की बाढ़ सी आ गई है। विशेष शाखा की रिपोर्ट के अनुसार निजामुद्दीन मरकज में लोहरदगा के तीन लोग शामिल हुए थे। इनमें हिंदू व आदिवासी भी हैं। पुलिस जांच कर रही है कि मरकज में शामिल लोगों ने कहीं हिंदू और आदिवासी के नाम पर फर्जी सिम कार्ड का तो उपयोग नहीं किया।

जिन तीन लोगों के नाम और मोबाइल नंबर विशेष शाखा की रिपोर्ट में दर्ज है, उन नंबरों की जांच से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे लोग कभी दिल्ली गए ही नहीं। इनमें से दो मोबाइल नंबर पर फोन रिसीव नहीं हो रहा है, जबकि एक नंबर दिल्ली में रिसीव हो रहा है। हां सवाल यह है कि जब तीनों दिल्ली गए ही नहीं तो उनके नाम और मोबाइल नंबर निजामुद्दीन मरकज में शामिल होने वाले लोगों की सूची में आया कैसे।

इससे इस बात को बल मिल रहा है कि साजिश के तहत निजामुद्दीन मरकज में शामिल कुछ लोगों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दूसरे की पहचान का सहारा लिया होगा। तब्लीगी जमात के लोगों द्वारा फर्जी सिम खरीद कर पहचान छिपाने की नीयत से उपयोग में लाए गए नंबर जांच चल रही है। पुलिस अधिकारी इस पर अभी कुछ भी खुलकर बोलने से गुरेज कर रहे हैं।

एक की रिपोर्ट आई थी निगेटिव

विशेष शाखा की ओर से दिल्ली जाने वाले लोगों की सूची में लोहरदगा के सरकारी कार्यालय में कार्यरत एक व्यक्ति का नाम सामने आया था। स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल संबंधित व्यक्ति के साथ एक अन्य को भी आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उनके सैंपल की जांच कराई थी, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। विशेष शाखा की रिपोर्ट में कहा गया था कि संबंधित व्यक्ति तब्लीगी जमात में शामिल हुआ था, परंतु स्थानीय स्तर पर पड़ताल से स्पष्ट हुआ कि वह बिहार शरीफ में आयोजित जमात में शामिल हुआ था।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस