रांची, जागरण संवाददाता। भारत बुधवार को अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर विभिन्न राज्यों की झांकियां निकली, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया। इसी क्रम में झारखंड की ओर से देवघर स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ मंदिर की झांकी निकाली गई।

झारखंड की झांकी में सबसे आगे भगवान बिरसा मुंडा को दर्शाया गया। जिनके साथ लोक कलाकार साथ-साथ चलते नजर आए। लोक कलाकार वाद्य यंत्र के साथ नजर आए। उसके बाद बैद्यनाथ मंदिर की झांकी निकली।झारखंड की झांकी की खूब तारीफ हुई।

बता दें कि देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर विश्व का एकमात्र शिवालय है, जहां पर शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। यही कारण है कि इसे शक्ति पीठ और हृदय पीठ भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवघर में ही माता सती का ह्रदय कट कर गिरा था, इसलिए इसे हृदय पीठ भी कहते हैं। सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु महादेव को जल चढ़ने के लिए आते हैं।

इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर 23 झांकियां पेश की गईं। इसमें से 17 झांकियां देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की थीं। इसके साथ ही 6 झांकियां सरकारी मंत्रालयों और विभागों से जुड़ी होंगी।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस साल पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर समेत 17 राज्यों की झांकियां प्रदर्शित की गई। इस साल परेड के दौरान हिमाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली की झांकी नहीं निकाली गई थी।

कैसे होता है झांकियों का सलेक्शन

गणतंत्र दिवस पर झांकियों के प्रदर्शन के लिए हर साल रक्षा मंत्रालय राज्यों से आवेदन मांगता है। किसी राज्य की झांकी को चुना जाएगा, यह तय रक्षा मंत्रालय की ओर से बनाई गई कमेटी के विशेषज्ञ करते हैं। हर साल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश झांकी के लिए नई थीम के साथ आवेदन करते हैं। आवेदना का एक्सपर्ट कमेटी रिव्यू करती है।

फिर, राज्य की झांकी से जुड़े नोडल ऑफिसर से कई चरणों में बातचीत की जाती है। सेलेक्शन होने के बाद एक थीम दी जाती है। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी झांकी की थीम, प्रेजेंटेंशन और टेक्निकल मुद्दों पर गाइडलाइन जारी करती है। राज्यों को उसके मुताबिक बदलाव करने होते हैं।

Edited By: Roma Ragini

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