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IAS पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, ED कोर्ट में मनी लांड्रिंग मामले में जारी रहेगा ट्रायल

Published: Fri, 25 Sep 2026 09:45 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने आइएएस पूजा सिंघल की याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनके खिलाफ मनरेगा घोटाला मामले में मनी ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को किया खारिज, ईडी कोर्ट के ट्रायल में हस्तक्षेप से इन्कार।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को किया खारिज, ईडी कोर्ट के ट्रायल में हस्तक्षेप से इन्कार।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने पूजा सिंघल की याचिका खारिज की।

  2. मनी लांड्रिंग मामले में ट्रायल जारी रहेगा।

  3. अभियोजन स्वीकृति का मुद्दा ट्रायल में तय होगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। सुप्रीम कोर्ट से मनी लांड्रिंग मामले में आरोपित आइएएस पूजा सिंघल को राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके विरुद्ध मनी लांड्रिंग के तहत चल रहे मामले में ईडी कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने वाले आदेश को निरस्त करने से फिलहाल इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन मंजूरी का मुद्दा कानून और तथ्यों से जुड़ा मिश्रित प्रश्न है, जिस पर ट्रायल के उचित चरण में अन्य साक्ष्य के साथ फैसला किया जाएगा।

अब पूजा सिंघल के खिलाफ मनी लांड्रिंग मामले की सुनवाई जारी रहेगी। पूजा सिंघल ने मामला चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

ईडी की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि विशेष अदालत वर्ष 2022 में ही मामले का संज्ञान ले चुकी थी और कार्यवाही काफी पहले शुरू हो चुकी है।

पूजा सिंघल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197 के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अभियोजन स्वीकृति नहीं ली गई थी।

पूजा सिंघल की ओर से कहा गया कि जब अभियोजन स्वीकृति का सवाल उठाया गया, तब ईडी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के उस प्रविधान का हवाला दिया, जिसमें कुछ परिस्थितियों में मंजूरी को स्वतः स्वीकृत माना जा सकता है।

बचाव पक्ष का तर्क था कि पूजा सिंघल भ्रष्टाचार के मामले में आरोपित नहीं हैं और मनी लांड्रिंग से जुड़े आरोप उनके आधिकारिक कार्यों से जुड़े हैं। इसलिए धारा 197 के तहत पूर्व अनुमति जरूरी थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान जस्टिस जायमाल्या बागची ने यह भी उल्लेख किया कि पूजा सिंघल से जुड़े मामले में 19 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर अभियोजन मंजूरी के सवाल पर अंतिम टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह देखना जरूरी होगा कि कथित अपराध के समय अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रही थीं या नहीं।

पीठ ने कहा कि मंजूरी के मुद्दे को खुला रखा जाएगा, ताकि ट्रायल के उचित चरण में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर इस पर फैसला किया जा सके। अदालतों की एक दिलचस्प आदत है, वे हर सवाल का जवाब उसी समय नहीं देतीं। कुछ जवाब सबूतों के पकने का इंतजार करते हैं।