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हिंदू समाज अपनी जड़ों की ओर लौटे, मंदिर और श्मशान पर सबका हो समान अधिकार: सुनीता हलदेकर

Published: Mon, 09 Mar 2026 03:10 AM (IST)

सुनीता हलदेकर ने रांची में विराट हिंदू सम्मेलन में कहा कि हिंदू समाज सबसे उदार है, पर उसे अपनी जड़ों ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रांची। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता हलदेकर ने कहा कि हिंदू समाज विश्व का सबसे उदार समाज है। इसका फायदा दूसरे लोग उठाते हैं। हिंदू समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। समाज में समरसता बनी रहे, इस पर सभी लोगों को मिलकर विचार करना होगा।

समाज में मंदिर, श्मशान और जल पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए। इसे लेकर हिंदू समाज में कोई भेदभान न हो। वे रविवार को रांची के पंडरा स्थित चटकरपुर में सनातन समाज की ओर से आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित कर रहीं थीं। कार्यक्रम में हिंदू समाज के सैकड़ों सदस्य एकत्रित हुए, जहां वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और छुआछूत मुक्त समाज के संकल्प को दोहराया। महिलाओं की संख्या काफी थी।

सुनीता हलदेकर ने 'रघुकुल रीति' का स्मरण कराते हुए नारी शक्ति के विस्तार, भारत माता की प्रतिष्ठा और सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करने का आह्वान किया। पंच परिवर्तन से व्यक्ति निर्माण और सुदृढ़ परिवार व्यवस्था पर जोर दिया। कहा, परिवार में एकता बनी रहनी चाहिए। हम अलग-अलग रहें परंतु एक रहें।

समय-समय पर मिलते रहें। परिवार में रहने वाले सभी लोग सप्ताह में एक दिन तो जरूरत साथ में भोजन करें। सामाजिक समरसता को बनाए रखें। घर की महिलाएं पर्यावरण संरक्षण को लेकर सजग हों। नागरिक कर्तव्यों का पालन जरूर करें। महाकुंभ की तुलना करते हुए जीवन के हर क्षेत्र में एकजुट रहने का आह्वान किया।

हिंदू समाज को अपने अतीत को पहचानना होगा: स्वामी परिपूर्णतानंद

इस मौके पर चिन्मय आश्रम, रांची के स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती ने कहा, हिंदू समाज को अपने अतीत को पहचानना होगा। समाज में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो हिंदू समाज में विभेद पैदा करने में लगे हैं। ऐसे लोगों से बचने की जरूरत है। उन्होंने परिवार में बच्चों को संस्कारवान और योग्य बनाने, परंपराओं जैसे तिलक-जनेऊ का गर्व से पालन करने तथा धन का सदुपयोग समाज-धर्म कार्यों में करने पर जोर दिया।

अतिथि सत्कार और दान को सौभाग्य बताते हुए उन्होंने एकजुट समाज की अपील की। समापन राष्ट्रव्यापी भाव "मैं रहूँ या न रहूँ, मेरा समाज रहे" गीत के एवं भारत माता की आरती के साथ हुआ।