रांची, जासं। रांची के पीपी कंपाउंड निवासी अनिल कुमार चौधरी से मनु का सरेंडर नाम की फिल्म बनाने के नाम पर 65 लाख की ठगी कर ली गई। इसे लेकर अनिल कुमार चौधरी ने चुटिया थाने में एफआइआर दर्ज कराई है। एफआइआर में महाराष्ट्र के ठाने निवासी सुधा चौधरी, राजेश तिवारी और नेहा सांडीलिया को आरोपित बनाया गया है। इस मामले की जांच के लिए रांची पुलिस की एक टीम महाराष्ट्र जाएगी।

एफआईआर में आरोप है कि आरोपितों ने जिस फिल्म के लिए उनसे पैसा लिया। उसका नाम बदला दिया गया और टरमिनेशन लेटर भेजकर उन्हें प्रोडक्शन टीम से टरमिनेट कर दिया गया। इसके अलावा फिल्म की टीम में से को-प्रोड्यूसर से भी हटा दिया गया। पीड़ित बुजुर्ग अनिल चौधरी ने पुलिस को बताया है कि आरोपित सुधा चौधरी एक सरकारी कार्यालय की कर्मी है। उसने अपना एक कंपनी रोज क्वार्ज इंटरटेंमेंट बनायी है।

जिसकी प्रोपराइटर उनकी बेटी नेहा है। आरोपित सुधा ने उन्हें सरेंडर नामक फिल्म निर्माण करने की बात कही। यह प्रस्ताव दिया कि अगर वह इस फिल्म में राशि लगाएंगे तो उन्हें को-प्रोड्यूसर बनाया जाएगा। फिल्म की लागत 2.50 करोड़ का कुल 25 प्रतिशत राशि उन्हें लगाना होगा। सहमति के बाद अनिल और सुधा के बीच एकरारनामा हुआ। अनिल ने रांची के एक होटल में 2017 में ही छह लाख रुपए एडवांस के तौर पर उन्हें दिया था। इसके बाद अलग-अलग तारीख को पैसे देकर कुल 65 लाख रुपये दिए।

सरकार को चूना लगाने की योजना का किया था विरोध

अनिल कुमार चौधरी के अनुसार वर्ष 2017 में फिल्म की शूटिंग रांची में शुरू हुई थी। फिल्म में काम करने वाले लोग रांची के होटलों में रहकर शूटिंग करने लगे। सुधा व नेहा भी रांची में ही थी। इस दौरान होटल का सारा खर्च वे ही वहन कर रहे थे। शूटिंग खत्म होने के बाद सुधा ने उनसे 15 लाख रुपये का डिमांड किया। कहा कि इस राशि को देने के बाद उसे खर्च का बिल मेल कर दिया जाएगा। इसी बीच झारखंड फिल्म वित्त निगम ने सरेंडर को जारी करने की अनुमति नहीं दी।

इसके बाद सुधा ने फिल्म का नाम लोहरदगा रखकर उसे ही वित्त निगम से जारी करवा दिया। इसके बाद फिल्म क लागत ढाई करोड़ की जगह साढ़े तीन करोड़ दिखाकर सरकार को सब्सीडी राशि में चूना लगाने की योजना बनाई। इसका विरोध करने पर उसे टरमिनेशन लेटर भेज दिया गया। फिल्म के को-प्रोड्य्सूर से हटा दिया गया। पैसा मांगने पर सुधा टाल-मटोल करने लगी। मेल का जबाव उसके पति राजेश तिवारी देने लगे। इसी बीच सुधा ने कंपनी से हटाने का उन्हें लेटर भेज दिया। राशि का भुगतान नहीं करने के बाद अनिल ने एफआइआर दर्ज कराई।

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