रांची, जेएनएन। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एबी सिंह की अदालत ने मूक बधिर दुष्कर्म पीड़िता की गवाही उनकी भाषा और इशारों को समझने वाले विशेषज्ञ की मदद से लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने झालसा के सदस्य सचिव को गवाही के दौरान मौजूद रहने के लिए अधिकृत भी किया है। अदालत ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त आदेश दिया है।

इस मामले में नाबालिग के साथ साहिबगंज में बानेश्वर मरांडी व जितेन सोरेन ने दो सितंबर 2015 को दुष्कर्म किया था। इस संबंध में रांगा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूर्व में इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निचली अदालत से रिकॉर्ड मंगाया था। उससे पता चला कि पीड़िता के मूक बधिर होने के कारण उसका बयान सही तरीके से दर्ज नहीं हो सका है। पीड़िता ने जो बताया था उससे पता चला कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है, लेकिन वह आरोपितों को पहचान नहीं पा रही है। रिकॉर्ड देखने के बाद हाई कोर्ट ने पूर्व में इसकी जांच हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (निगरानी) से कराई।

रजिस्ट्रार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पीड़िता अदालती प्रक्रिया को समझ नहीं पा रही है। उसे यह समझाने में दिक्कत आ रही है कि उसका बयान दर्ज किया जा रहा है। इसके बाद कोर्ट ने पीड़िता का बयान दर्ज कराने के लिए विशेषज्ञ की मदद लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पहले ही पीड़िता को तीन लाख मुआवजा देने का निर्देश भी सरकार को दिया है। अदालत ने दोनों आरोपितों की जमानत याचिका पहले ही खारिज कर दी थी। दोनों ने दोबारा जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।