रांची, राज्य ब्यूरो। राज्य में चिटफंड कंपनियों के अवैध कारोबार पर चौतरफा वार की तैयारी है। मुख्य सचिव डीके तिवारी ने इससे जुड़े मामलों में सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए पुलिस और रिजर्व बैंक को मिलकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्योर (एसओपी) गठित करने को कहा है। साथ ही राज्य के हर जिले में ऐसी जालसाजी की छानबीन के लिए डीएसपी स्तर के एक अधिकारी को नोडल अफसर बनाने का निर्देश दिया है।

उन्होंने रिजर्व बैंक के अधिकारियों से कहा कि वित्तीय जालसाजी के अनुसंधान में सहयोग के लिए वह पुलिस को वित्तीय एक्सपर्ट की सेवा उपलब्ध कराएं। वे बुधवार को वित्तीय जालसाजी पर रोकथाम के लिए राज्यस्तरीय समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

झालसा और आइपीआरडी लोगों को करेगा जागरूक

मुख्य सचिव ने चिटफंड कंपनियों की जालसाजी से बचने के लिए जागरूकता पर जोर दिया है। उन्होंने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को इस दिशा में समन्वय बनाकर काम करने की नसीहत दी। रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों ने एक वर्ष के अंदर 75 तथा सेबी के प्रतिनिधियों 600 जागरूकता कार्यक्रम किए जाने की जानकारी दी। साथ ही स्कूल-कालेजों में 72 हजार पोस्टर बांटने के अलावा पंचायत स्तर तक पर प्रचार-प्रसार किए जाने की जानकारी भी साझा की।

फर्जी विज्ञापनों पर रखें कड़ी नजर, 'सचेत' पर रखें ध्यान

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रचार-प्रसार के विभिन्न माध्यमों के जरिए फर्जी विज्ञापन देने वालों की भी निगरानी होनी चाहिए। आकर्षक प्रचार से लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाने के उपायों को उन्होंने एसओपी में शामिल करने का निर्देश दिया। रिजर्व बैक के प्रतिनिधियों ने इस दौरान मुख्य सचिव का ध्यान 'सचेत' नामक वेबसाइट की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि इस वेबसाइट पर फर्जीवाड़े से संबंधित किसी तरह की सूचना साझा की जा सकती है।

संदेहास्पद डिपॉजिट की सूचना दें बैंक

मुख्य सचिव ने लोगों को वित्तीय जालसाजी से बचाने में बैंकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि बैंक अपने संदेहास्पद डिपॉजिट की सूचना मुहैया कराएं, ताकि समय रहते जांच और कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। मुख्य सचिव ने कहा कि वित्तीय जालसाजी से संबंधित सूचना प्राप्त करने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करें। कोई सूचना आती है तो वे तत्काल रिजर्व बैंक के साथ साझा करें। इससे इतर किसी को फंसाने की नीयत से गलत सूचना देने की आशंका पर उसकी प्राथमिक जांच जरूर करें।

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Posted By: Sujeet Kumar Suman

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