रांची, राब्यू। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तमाम सीनियर नेता अभी भी नई दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। इनका लक्ष्य है कि वापसी नए अध्यक्ष के साथ हो। शनिवार की देर रात तक इसकी घोषणा नहीं होने के कारण मामला अब सोमवार तक के लिए टल गया है। इस बीच, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, विधायक सुखदेव भगत और कुछ अन्य लोग लौट आए हैं। लेकिन, बाकी दावेदार और उनके समर्थक दिल्ली में ही कैंप कर रहे हैं।

एक सीनियर नेता ने बताया कि अब जिस काम के लिए आए हैं, वह पूरा होने के बाद ही पूरी टीम लौटेगी। संकेत यही था कि नए अध्यक्ष के साथ टीम के लौटने का प्रोग्राम है। अभी नई दिल्ली में सुबोधकांत सहाय, ददई दुबे, रामेश्वर उरांव, गीताश्री उरांव, गीता कोड़ा आदि स्वयं अथवा उनके समर्थक कैंप कर रहे हैं। अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल नेताओं को उम्मीद है कि सोमवार तक नए अध्यक्ष का नाम सार्वजनिक हो जाएगा। इस घोषणा के साथ ही सभी वापस झारखंड लौटेंगे।

कोल ब्लॉक के लिए नहीं देंगे जमीन : स्टीफन
कोल ब्लॉक के विरोध में शनिवार को नाराज ग्रामीण तीर-धनुष व कचिया लेकर सड़क पर उतरे और डुगडुगी बजाकर जमकर विरोध किया। सरसडंगाल के हुलासडंगाल हटिया मैदान में सभा को संबोधित करते हुए महेशपुर विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने कहा कि किसी भी कीमत पर एक इंच जमीन कंपनी को नहीं देंगे। जल, जंगल व जमीन हमारी है। इसके लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा हमेशा लड़ते आ रहा है।

बता दें कि जमरूपानी शहरपुर कोल ब्लॉक के तहत उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को 21 गांव का क्षेत्र केंद्र सरकार द्वारा आवंटित किया गया है। इधर, अंचल अधिकारी ने संबंधित गांव के ग्राम प्रधानों को कोल ब्लॉक की सहमति के लिए ग्रामसभा कर सहमति पत्र अंचल कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है। सभा को संबोधित करते हुए विधायक नलीन सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा गुरुजी के नेतृत्व में हमेशा आदिवासियों के हित में लड़ती रही है और लड़ती रहेगी।

आदिवासियों की जमीन कंपनी के हाथ में देने की सरकार की मंशा सफल नहीं होने देंगे। किसी भी कीमत पर कोयला खदान नहीं चलने देंगे। इसके लिए जान देना पड़ेगा तो दे देंगे। वहीं, कोल ब्लॉक के विरोध में सुबह से ही मुख्य पथ से मझलाडीह रोड तक ग्रामीणों के विरोध के कारण एक भी वाहन नहीं चले। सरसडंगाल, मकड़ापहाड़ी, चिरूडीह, निझोर एवं मंझलाडीह की सभी पत्थर खदानें व क्रेशर उद्योग जनता के समर्थन में बंद रहे।

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