रामगढ़, [दिलीप कुमार सिंह]। Jharkhand News, Ramgarh Samachar संघर्ष और जद्दोजहद ये दो शब्द मानो जीवन का हिस्सा ही बन गए हैं, या यह कहें कि ये शब्द ऐसे ही संघर्ष करने वालों के लिए बना है। क्योंकि आम दिन हो या पूर्ण लॉकडाउन या फिर आंशिक लॉकडाउन, मार हमेशा फुटपाथ में जीवन चलाने वालों पर ही पड़ती है। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। दोपहर दो बजे से पहले जिंदगी को रफ्तार देने की कोशिश, उसके बाद जिंदगी जीने की कोशिश होती है। क्योंकि दो बजे दोपहर के बाद आंशिक लॉकडाउन की शर्तें लागू हो जाती है।

ऐसे में बाजार बंद होने और फुटपाथ पर दुकानें लगाने वाले सामान समेटने में जुट जाते हैं। हर बार की तरह इस बार भी फुटपाथी दुकानदारों के समक्ष रोटी का भारी संकट उत्पन्न हो गया है। छोटे-छोटे होटल और चाय दुकान चलाने वाले भी संकट से हर दिन गुजर रहे हैं। इनके लिए राज्य सरकार की ओर से कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ना ही किसी राजनीतिक दल, नेता, प्रतिनिधि, मोर्चा आदि ने भी पहल की है। सहयोग तो दूर, इन्हें झांकने ताकने वाले तक नहीं हैं।

ऐसे में दुकानदारों की हालत बेहद खराब है। रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले फुटपाथी दुकानदारों के पास वर्तमान समय में रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। खासकर चाट, छोले, इडली-डोसा, चाउमीन, चाय दुकान, बर्गर, भूंजा बेचने वाले समेत अन्य फास्ट फूड के दुकान लगाने वालों की बिक्री तो पूरी तरह बंद हो गई है। उनके सामने बड़ी परेशानी यह है कि परिवार का भरण-पोषण कैसे किया जाए। कई तो रोजगार के लिए उधार भी लिए हुए हैं। ऐसे दुकानदार तो आसमां की ओर ही देखकर उम्मीद लगाए हुए हैं।

केस स्टडी

-बरकाकाना निवासी वृजलाल साव ने ठेला काे चलाने के लिए लोन लिया है। उसे चुकता करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है।

-रामगढ़ के छोला बेचने वाले बैजनाथ लाल परेशानी के साथ दो-दो हाथ हो रहे हैं। परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटानी मुश्किल हो रही है।

-बिजुलिया के रोहन साव ठेला लगाकर चाउमीन बेचते हैं। यह व्यापार शाम के वक्त ज्यादा होता है। ऐसे में दो बजे दोपहर को दुकान बंद करना सीधे धंधे सहित पेट पर मार पड़ रही है।

-बरकाकाना के कौशल कुमार भूंजा व गोलगप्पा बेचते हैं। यह व्यापार भी शाम के वक्त ज्यादा होता है। ऐसे में ठेला बंद होने से परिवार के समक्ष दो जून की रोटी के लाले पड़ रहे हैं।