रांची, [दिलीप कुमार]। Side Effects of India Lockdown वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण झारखंड समेत पूरे देश में लॉकडाउन है। लोगों को घरों में ही रखने में पुलिस को भले मशक्कत करनी पड़ रही हो लेकिन अपराध खुद ब खुद लॉकडाउन हो गया है। राज्य कई जिलों में बीते दो दिनों में एक भी अपराध दर्ज नहीं किया गया है वहीं संगीन अपराध के मामले भी काफी कम हो गए हैैं। मारपीट के कुछ मामले सामने आ रहे हैैं।

इसका सकारात्मक असर यह पड़ा कि पुलिस को भी विधि-व्यवस्था संभालने के पीछे भागना नहीं पड़ रहा है। जो ऊर्जा पहले विधि-व्यवस्था संभालने में खर्च हो रही थी, अब उसे कोरोना के खिलाफ लड़ाई में झोंक दिया गया है। यही कारण है कि राज्य के 80 हजार जवान-अधिकारी रोटेशन के आधार पर लॉकडाउन के दौरान विधि व्यवस्था को संभालने में जुटे हैं।

जनता कफ्र्यू के दिन यानी 22 मार्च के बाद से ही राज्य में अपराध का आंकड़ा बहुत हद तक कम हो चला है। पूरे राज्य में प्रतिदिन जहां औसतन 150 से 200 आपराधिक मामले दर्ज हो रहे थे, वही लॉकडाउन व जनता कफ्यू के दौरान प्रति दिन डेढ़ से दो दर्जन छोटे-छोटे मामले दर्ज हुए। राज्य में कहीं से भी किसी बड़ी वारदात की सूचना नहीं है। 

दो दिनों के भीतर दर्ज मामले

रांची : 0

दुमका : 0

सरायकेला-खरसांवा : 0

लातेहार : 0

पश्चिमी सिंहभूम : 0

गुमला : 1

यहां सिर्फ आपसी मारपीट की घटनाएं :

गढ़वा : 2

कोडरमा : 2

हजारीबाग : 2

पाकुड़ : 4

राज्य में औसतन प्रतिदिन होने वाली वारदात

हत्याएं : चार से पांच।

डकैती : हर तीसरे दिन।

लूट : दो।

अपहरण : तीन से चार।

चोरी : 25 से 30 घटनाएं।

दुष्कर्म : तीन से चार।

दंगा : पांच से छह।

तोड़कर चोरी की घटनाएं नहीं के बराबर

राज्य में पुलिस के समक्ष सबसे बड़ी समस्या चोरी की घटनाएं हैं। कोई ऐसा दिन नहीं होगा, जिस दिन 25 से 30 चोरी की घटनाएं नहीं घटती होती। लॉक डाउन में जब घरों में लोग कैद हुए तो चोरों के मंसूबों पर भी पानी फिर गया। तीन दिनों के भीतर घर व फ्लैट का ताला तोड़कर चोरी की इक्का-दुक्का घटनाएं घटी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कामकाजी लोग काम पर नहीं जा रहे हैं। कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए सभी अपने-अपने घरों में कैद हैं। संभव है कि इसी वजह से चोर घरों को निशाना नहीं बना पा रहे हैं।

सीबीआइ व एनआइए का अनुसंधान भी बंद पड़ा

कोरोना वायरस के चलते सीबीआइ व एनआइए का अनुसंधान भी फिलहाल बंद पड़ा हुआ है। राज्य में टेरर फंडिंग की जांच कर रही एनआइए के अधिकारियों ने भी मूवमेंट को फिलहाल रोक दिया है। वहीं, बकोरिया पुलिस मुठभेड़ मामले का अनुसंधान भी फिलहाल ठंडे बस्ते में है। इन केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारी व कर्मी भी कोरोना वायरस के खतरे से दहशत में हैं और विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।

'लॉकडाउन में सभी घरों में हैं। बाहर पुलिस की चेकिंग चल रही है। अपराधियों के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल है। यही कारण है कि अपराध की घटनाओं में काफी कमी आई है।' -साकेत कुमार सिंह, आइजी ऑपरेशन, झारखंड।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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