नियति ने मुझे यहां लाया, अब संसार ही परिवार: पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता राजनीति में प्रवेश पर बोलीं
श्वेता शर्मा ने पति सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन के बाद राजनीति में प्रवेश किया है, जिसे वे नियति ...और पढ़ें

पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनाव प्रचार के लिए घर से निकली थी श्वेता। (फोटो: फाइल)
HighLights
श्वेता शर्मा ने पति सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद राजनीति में कदम रखा।
उनका मानना है कि नियति ने उन्हें राजनीति में लाया, अब संसार ही परिवार है।
अनाथालय के बच्चों की खुशी में मगन रहती थीं, अब अपना दुख किसे सुनाएं।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राजनीति में पदार्पण के बाद से उनके बेहद करीबी रहे सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन के बाद उनकी पत्नी श्वेता शर्मा का राजनीति में प्रवेश हो चुका है। झामुमो की जिला कार्यसमिति के बारंबार अनुरोध पर वे कार्यकर्ताओं के बीच गईं। वादा किया कि वे अपने लोगों के बीच रहेंगी। श्वेता शर्मा कहती हैं, नियति मुझे राजनीति में ले आई।
इसकी कभी कल्पना नहीं की थी। ईश्वर की माया को अपनी माया है। पति का निधन हुआ तो दरवाजे पर हजारों लोग उमड़ पड़े। ऐसे लोग दिखे जो जार जार बिलख रहे हैं। रोज घर पर सैकड़ों लोग उम्मीद लेकर आ रहे हैं। कैसे मना करूं। अब लगता है, संसार ही परिवार है।
अप्रैल 2000 में श्वेता और सुदिव्य कुमार सोनू का विवाह हुआ था। श्वेता मूलत: मुंगेर के जमालपुर की रहने वाली है। ससुराल गिरिडीह आई तो कुछ महीनों के बाद अलग झारखंड का गठन हुआ था। उन्हें याद है कि हजारों लोगों के साथ पतिदेव ने खूब जश्न मनाया था।
रसोई में सुबह से रात हो गई थी। उनके मंत्री बनने तक श्वेता का राजनीति से इतना भर रिश्ता था कि जो महिलाएं दूरदराज से आती थीं, उन्हें पतिदेव सोनू घर में भेज देते थे।
महिलाओं का दुखड़ा सुनना और उनके निदान के लिए पति को समझाने तक राजनीति में उनकी भूमिका रही है। अब श्वेता शर्मा की दुनिया बदल चुकी है। राजनीति में कदम रखने के बाद श्वैता शर्मा ने दैनिक जागरण को दूरभाषीय साक्षात्कार दिया। प्रमुख अंश-
प्रश्न: व्यक्तिगत तौर पर राजनीति में कदम रखने के लिए मानसिक तौर पर तैयार है?
उत्तर : कभी नहीं सोची थी। पति के जीवित रहते महिलाओं से मिलती थी। वो दूरदराज से आती थी तो चाय पानी देखती थी। उनकी व्यथा के निदान की कोशिश करती थी। इतना ही सरोकार था। अब समझ आ रहा है कि हजारों लोग ऐसे हैं जिनसे पतिदेव का परिवार की तरह रिश्ता रहा है। उन लोगों का भरोसा है। चाहे या न चाहे, अब राजनीति मेरी और मेरे परिवार की नियति है।
प्रश्न: पिछले विधानसभा चुनाव में आपने प्रचार तो किया था?
उत्तर : हां। झामुमो कार्यकर्ताओं के परिवार से जुड़ी कई महिलाएं घर पर आई थी। उन्हीं लोगों की जिद पर कुछ दिन तक पति के लिए चुनाव प्रचार के लिए गई थी। मुझे याद है, पीरटांड़ में लोगों ने बहुत सम्मान दिया था।
प्रश्न : राजनीति से इतर क्या कार्य है जिससे प्रसन्नता होती है ?
उत्तर : वृद्ध आश्रम में जाने पर आंतरिक शांति मिलती हैं। गिरिडीह के क्रिश्चियन स्कूल के पास अनाथालय है। हर दीपावली वहां जाती हूं। बच्चों को उपहार देती हूं। उनकी सुनती हूं। उनसे बोलती हूं। मासूम बच्चों की खुशी देख जो सुकून मिलता है कि उसे बयां नहीं कर सकती। मगर अब अपना दुख किसे सुनाऊं।
प्रश्न : कल्पना सोरेन के साथ कैसा रिश्ता रहा है?
उत्तर : बिल्कुल परिवार का। घर के भीतर हमेशा हम परिवार की बातें करते रहे हैं। अपनापन का गहरा अहसास है। वो बहुत नेकदिल हैं। उन पर भरोसा है।
प्रश्न : पतिदेव के निधन के बाद मंत्री बनने का आफर मिला है?
उत्तर : इस बारे में मैंने न सोचा है न किसी ने कुछ कहा है। मुझे कुछ नहीं पता है। पतिदेव अब दुनिया में नहीं रहे। हेमंत भइया और कल्पना भाभी मुझे और मेरे परिवार को अच्छे से जानते और समझते हैं। जो बोलेंगे वही करना है। और कुछ नहीं जानते।
